दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बिहार के गया में नकली दवाओं की बड़ी फैक्ट्री का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 9 दबोचे गए (Watch Video)
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

Gaya Fake Drug Factory Busted: दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशे और नकली दवाओं के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन में बिहार के गया जिले में चल रही एक अत्याधुनिक नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. इस छापेमारी में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने मौके से अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ट्रामाडोल और भारी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की हैं.

अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

यह कार्रवाई कुछ दिन पहले पटना में पकड़ी गई एक अवैध दवा फैक्ट्री से मिले सुरागों के आधार पर की गई है. जांच में सामने आया है कि यह एक सुनियोजित अंतरराज्यीय नेटवर्क है जो न केवल नकली दवाएं बना रहा था, बल्कि ट्रामाडोल जैसे प्रतिबंधित ओपियोइड्स (नशीली दवाएं) की तस्करी में भी शामिल था. दिल्ली पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया जानकारी की मदद से गया में इस यूनिट का पता लगाया.

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मास्टरमाइंड और मॉड्यूल का खुलासा

पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी तनिष्क, 59 वर्षीय अरुण कुमार के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को चला रहा था. अरुण गया में बिना किसी लाइसेंस, अप्रूवल या योग्य केमिस्ट के यह फैक्ट्री संचालित कर रहा था. छापेमारी के दौरान स्थानीय औषधि विभाग (Drug Department) की टीम भी पुलिस के साथ मौजूद थी.

करोड़ों की नशीली दवाएं और उपकरण बरामद

पुलिस ने फैक्ट्री से भारी मात्रा में तैयार दवाइयां और कच्चा माल जब्त किया है, जिसका विवरण इस प्रकार है:

  • ट्रामाडोल पाउडर: 5 किलोग्राम से अधिक (अंतरराष्ट्रीय कीमत ₹5 करोड़ से ज्यादा).

  • नकली जिंक टैबलेट: 1,19,800 गोलियां.

  • नकली एजिथ्रोमाइसिन: 42,480 टैबलेट.

  • पैरासिटामोल रॉ मटेरियल: 27 किलोग्राम.

  • डिलोना एक्वा एम्प्यूल: 444 नकली इंजेक्शन.

जांच में पता चला कि आरोपी ट्रामाडोल पाउडर को गोलियों में प्रोसेस कर फर्जी मेडिकल स्टोर के जरिए ऊंचे दामों पर बेचते थे. इन गोलियों का इस्तेमाल अक्सर हेरोइन के विकल्प के तौर पर नशे के लिए किया जाता था.

जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

अधिकारियों ने बताया कि यह सिंडिकेट कच्चे माल की खरीद से लेकर निर्माण और वितरण तक पूरी सप्लाई चेन को खुद ही नियंत्रित करता था. नकली और घटिया दवाओं का यह कारोबार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वितरण केंद्रों की तलाश में छापेमारी कर रही है.