India AI Impact Summit 2026 Final Day: राजधानी दिल्ली (Delhi) के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में चल रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' (India AI Impact Summit 2026) का आज, शनिवार 21 फरवरी को अंतिम दिन है. इस हाई-प्रोफाइल वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान भारी भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा और सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए सुबह 9:00 बजे से रात 8:00 बजे तक विशेष प्रतिबंध लागू रहेंगे. यह भी पढ़ें: India AI Impact Summit 2026: पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स को दिया 'मातृभाषा' का मंत्र, एथिकल टेक्नोलॉजी और स्वदेशी समाधानों पर दिया जोर
इन रास्तों पर पड़ेगा असर
ट्रैफिक एडवाइजरी के मुताबिक, शिखर सम्मेलन स्थल के आसपास के प्रमुख मार्गों पर सामान्य यातायात प्रभावित होने की संभावना है. वाहन चालकों को निम्नलिखित सड़कों से बचने की सलाह दी गई है:
- भैरों रोड
- भगवान दास रोड
- पुराना किला रोड
- मथुरा रोड
वैकल्पिक मार्ग और सुझाव
ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों को देरी से बचने के लिए तिलक मार्ग, सिकंदरा रोड और रिंग रोड जैसे वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने का सुझाव दिया है. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं, अतिरिक्त समय लेकर निकलें और ड्यूटी पर तैनात यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें.
शिखर सम्मेलन के तीन प्रमुख 'सूत्र'
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 'ग्लोबल साउथ' में आयोजित अपनी तरह का पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है. यह शिखर सम्मेलन मुख्य रूप से तीन आधारभूत स्तंभों या 'सूत्रों' पर आधारित है:
पीपल (लोग): मानव-केंद्रित एआई जो अधिकारों की रक्षा करे.
- प्लैनेट (ग्रह): एआई का पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकास.
- प्रोग्रेस (प्रगति): समावेशी आर्थिक और तकनीकी उन्नति. यह भी पढ़ें: ‘Bad Experience’: दिल्ली के ट्रैफिक में 4 घंटे फंसी रहीं दिग्गज AI रिसर्चर सारा हुकर, पीएम मोदी के साथ डिनर में नहीं हो पाईं शामिल
वैश्विक भागीदारी और महत्व
इस समिट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा करने के लिए दुनिया भर के नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने का काम किया है.
- सम्मेलन में 110 से अधिक देशों ने भाग लिया.
- 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और लगभग 45 मंत्रियों की उपस्थिति रही.
- खास बात यह रही कि इसमें करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों (HoS/HoG) ने भी शिरकत की.
इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसी वैश्विक रूपरेखा तैयार करना है जहां एआई का उपयोग बिना किसी भेदभाव के पूरी मानवता के कल्याण के लिए किया जा सके.










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