Neha Singh of Galgotias University: गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में रोबोडॉग विवाद के बाद प्रोफेसर नेहा सिंह को निलंबित कर दिया गया है. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि प्रोफेसर को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें जांच पूरी होने तक संस्थान में बने रहने के लिए कहा गया है. रजिस्ट्रार ने कहा कि किसी एक व्यक्ति की चूक के लिए पूरी यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान शुरू हुआ. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह एक चार पैरों वाले रोबोडॉग 'ओरियन' (Orion) का प्रदर्शन कर रही थीं. वीडियो में उन्होंने दावा किया कि इसे यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित किया गया है. हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों और नेटिजन्स ने जल्द ही पहचान लिया कि यह रोबोडॉग असल में चीनी कंपनी 'यूनिट्री' (Unitree) का उत्पाद है, जिसे व्यावसायिक रूप से खरीदा जा सकता है.
रजिस्ट्रार ने दी सफाई: "यह शब्दों का भ्रम था"
रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए कहा कि यह पूरी स्थिति शब्दों के गलत चयन के कारण पैदा हुई. उनके अनुसार, "डेवलप" (विकसित करना) और "डेवलपमेंट" (विकास कार्य) के बीच भ्रम पैदा हो गया था. यूनिवर्सिटी ने रोबोडॉग को छात्रों के शोध और सीखने के लिए खरीदा था, न कि इसे खुद बनाने का दावा करने के लिए. गौर ने स्वीकार किया कि प्रदर्शन के दौरान गलती हुई और यूनिवर्सिटी ने इसके लिए माफी मांगते हुए समिट से अपना स्टॉल हटा लिया है.
#WATCH | Noida, UP: On Galgotias University asked to vacate India AI Impact Summit expo, Nitin Kumar Gaur, Galgotias University Registrar says, "We (Galgotias University) have already given our explanation. I told you yesterday that it was a mistake, we are sorry for that... We… pic.twitter.com/rVDLMUfSMb
— ANI (@ANI) February 19, 2026
प्रोफेसर नेहा सिंह का पक्ष
विवाद के केंद्र में रहीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी अपनी सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. उनका उद्देश्य केवल यह बताना था कि छात्र इस तकनीक पर काम कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मैनेजमेंट स्कूल में संचार (Communications) की प्रोफेसर हैं, न कि एआई (AI) विशेषज्ञ. विवाद बढ़ने के बाद उनके लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल पर 'ओपन टू वर्क' स्टेटस दिखने से उनके इस्तीफे की खबरें उड़ने लगी थीं, जिसे अब यूनिवर्सिटी ने खारिज कर दिया है.
आगे की कार्रवाई
यूनिट्री रोबोडॉग विवाद के बाद सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है. आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि प्रदर्शकों को केवल वही चीजें दिखानी चाहिए जो उनकी अपनी मौलिक खोज हों. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अब एक विस्तृत आंतरिक जांच शुरू की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह 'तथ्यात्मक गलती' कैसे हुई. रजिस्ट्रार ने दोहराया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, लेकिन फिलहाल किसी भी फैकल्टी मेंबर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है.













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