काठमांडू: नेपाल (Nepal) में इस समय राजनीतिक उथल-पुथल जारी है. मंगलवार को केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली है. भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन के बाद अब तक कोई स्थायी नेता सामने नहीं आया है. बुधवार शाम काठमांडू स्थित आर्मी हेडक्वार्टर्स के बाहर Gen-Z प्रदर्शनकारियों के दो गुट आपस में भिड़ गए. इससे साफ है कि अगला पीएम कौन होगा, इसे लेकर अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है.
अगले कुछ दिनों में ही फैसला होने की उम्मीद है. क्या नेपाल एक युवा नेता को मौका देगा या सुषिला कार्की जैसी अनुभवी हस्ती को? Gen-Z की भूमिका और जनता का दबाव इस फैसले को निर्णायक बनाएगा. दुनिया की नजरें अब काठमांडू पर टिकी हैं.
कौन-कौन हैं पीएम की दौड़ में?
अब तक चार बड़े नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं
- बालेंद्र शाह बालेन- काठमांडू के मेयर और चर्चित रैपर, 35 साल के, युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय.
- हर्का सांपांग राय- धरान के मेयर, 42 साल के, अपने सादगीपूर्ण और जनहितकारी कामों के लिए जाने जाते हैं.
- कुलमान घिसिंग- नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख, 54 साल के, जिन्हें देश में बिजली कटौती खत्म करने का श्रेय मिलता है.
- रबी लामिछाने- पत्रकार से नेता बने, 51 साल के, जिनकी गिरफ्तारी के बाद युवाओं ने उन्हें जेल से छुड़ाया था.
- इसके अलावा पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की (73 वर्ष) का नाम भी चर्चा में है. अगर वे चुनी जाती हैं, तो नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन सकती हैं.
Gen-Z का रोल
यह आंदोलन ज्यादातर Gen-Z युवाओं द्वारा चलाया गया है. आयोजकों ने पहले ही कहा था कि प्रदर्शन का नेतृत्व 28 साल के आसपास की पीढ़ी करेगी. यही वजह है कि पुराने नेता जैसे ओली (73) और प्रचंड (70) अब जनता की नजरों में अप्रासंगिक हो गए हैं. अब सवाल यह है कि क्या युवा किसी 50 से ज्यादा उम्र के नेता को स्वीकार करेंगे या बालेन जैसे युवा चेहरे को मौका देंगे.
राष्ट्रपति की अपील और सेना की भूमिका
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शांति बनाए रखने की अपील की है. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने जेन-जेड प्रतिनिधियों से जल्द निर्णय लेने को कहा है. वहीं सेना भी हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि अस्थिरता ज्यादा न बढ़े.
नेपाल की मौजूदा चुनौती
नेपाल फिलहाल गहरे संकट से गुजर रहा है. सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध अब व्यापक असंतोष में बदल चुका है. हिंसा में 30 से ज्यादा लोगों की जान गई और कई पुराने नेताओं के घरों को भीड़ ने जला दिया. अब देश को न सिर्फ नया प्रधानमंत्री चाहिए बल्कि स्थिरता और भरोसा भी चाहिए.













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