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E. Coli Infection: ई.कोलाई इन्फेक्शन क्या है? जानें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

भोपाल के कई रिहायशी इलाकों के भूजल में E. coli बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर निवासियों को बिना उबला पानी न पीने की सलाह दी है. जानें इस संक्रमण के लक्षण और बचाव के तरीके.

E. Coli Infection: ई.कोलाई इन्फेक्शन क्या है? जानें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके
ई.कोलाई (Photo Credits: Wikipedia)

भोपाल: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)  की राजधानी भोपाल (Bhopal) में जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के दौरान एक चिंताजनक मामला सामने आया है. दरअसल, हाल ही में हुए लैब टेस्ट में भोपाल शहर के कई रिहायशी इलाकों में बोरवेल और हैंडपंप के भूजल (Groundwater) नमूनों में E. coli (ई-कोलाई) बैक्टीरिया पाया गया है. इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है. प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे सीधे तौर पर अनुपचारित (Untreated) पानी का सेवन न करें, क्योंकि यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि ई.कोलाई संक्रमण आखिर है क्या? इसके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके क्या हैं. यह भी पढ़ें: Indore Water Crisis: इंदौर की बेकरी गली में नलों से आ रहा कीड़े-मकोड़ो वाला पानी, बच्चे बीमार; निवासियों ने सुनाई बदहाली की दास्तां

क्या है E. coli संक्रमण?

एस्चेरिचिया कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया का एक समूह है, जो आमतौर पर मनुष्यों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है. हालांकि अधिकांश स्ट्रेन हानिकारक नहीं होते, लेकिन कुछ खास पैथोजेनिक स्ट्रेन गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं. भोपाल के मामले में मुख्य चिंता मल-दूषित (Fecal contamination) जल से होने वाले आंतों के संक्रमण की है.

संक्रमण के मुख्य लक्षण

दूषित पानी के सेवन के 3 से 4 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इसके मुख्य संकेतों में शामिल हैं:

  • पेट में तेज ऐंठन और दर्द.
  • अचानक दस्त लगना (जो बाद में खूनी दस्त में बदल सकते हैं).
  • जी मिचलाना और उल्टी होना.
  • हल्का बुखार, कमजोरी और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ वयस्क एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में यह संक्रमण हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम (HUS) का रूप ले सकता है, जिससे किडनी फेल होने का खतरा रहता है.

भूजल दूषित होने के कारण

पीने के पानी के स्रोतों में मानवीय या पशु अपशिष्ट मिलने से E. coli फैलता है. भोपाल में इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • सीवेज रिसाव: पुरानी या टूटी हुई सीवेज पाइपलाइनों से रिसाव.
  • सेप्टिक टैंक: खराब रखरखाव वाले सेप्टिक टैंकों से गंदगी का भूजल में मिलना.
  • शहरी अपवाह: बारिश के दौरान नालियों का ओवरफ्लो होकर जल स्तर में मिलना.

विशेष बात यह है कि coli के कारण पानी के स्वाद, गंध या रंग में कोई बदलाव नहीं आता, इसलिए केवल लैब टेस्ट से ही इसका पता चलता है. यह भी पढ़ें: Amroha Water Scare: इंदौर समेत अन्य शहरों के बाद अब यूपी के अमरोहा में ट्यूबवेल से निकला पीला पानी, किसानों की सेहत बिगड़ने पर प्रशासन में मचा हड़कंप

बचाव के लिए जरूरी टिप्स

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • पानी उबालें: पीने के पानी को कम से कम एक मिनट तक अच्छी तरह उबालने के बाद ही इस्तेमाल करें.
  • क्लोरीनीकरण: स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्लोरीन की गोलियों का उपयोग करें.
  • हाइजीन का ध्यान: शौचालय के उपयोग के बाद और खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं.
  • खाद्य सुरक्षा: फलों और सब्जियों को साफ पानी से धोएं और मांस को अच्छी तरह पकाकर खाएं.
  • वॉटर टेस्टिंग: यदि आप निजी बोरवेल का उपयोग करते हैं, तो प्रमाणित प्रयोगशाला में उसकी जांच जरूर करवाएं.

हेल्थ अधिकारियों ने निवासियों से कहा है कि जब तक ग्राउंडवॉटर की क्वालिटी में सुधार नहीं होता और आगे के टेस्ट के नतीजे नहीं आ जाते, तब तक अलर्ट रहें और एडवाइजरी का पालन करें.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 10, 2026 03:59 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).