Amroha Water Scare: इंदौर समेत अन्य शहरों के बाद अब यूपी के अमरोहा में ट्यूबवेल से निकला पीला पानी, किसानों की सेहत बिगड़ने पर प्रशासन में मचा हड़कंप
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Amroha Water Scare: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में ट्यूबवेल से पीला पानी निकलने की घटना ने प्रशासन और स्थानीय किसानों के बीच हड़कंप मचा दिया है. किसानों का आरोप है कि इस दूषित पानी के कारण उन्हें त्वचा रोगों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट (DM) निधि गुप्ता वत्स ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या औद्योगिक कचरे या रसायनों के रिसाव के कारण भूजल का रंग बदला है.

जांच के लिए गठित की गई संयुक्त टीम

जिला मजिस्ट्रेट निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि प्रशासन ने सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की है. इस मामले की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के अधिकारी, कृषि विभाग के विशेषज्ञ और उद्योग विभाग के अधिकारी शामिल हैं। इस टीम को प्रभावित क्षेत्रों के विभिन्न स्थानों से पानी और मिट्टी के नमूने एकत्र करने का निर्देश दिया गया है. इन नमूनों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है ताकि पानी में मौजूद हानिकारक रसायनों की पहचान की जा सके. यह भी पढ़े: Indore Contaminated Water: इंदौर में दूषित पानी पीने से 13 की मौत और हजारों बीमार, विपक्ष ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की

प्रभावित गांवों में लगाए जा रहे स्वास्थ्य शिविर

किसानों की शिकायतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट पर है। डीएम ने कहा कि मिट्टी और पानी के नमूने पहले ही जांच के लिए भेजे जा चुके हैं और रिपोर्ट आने का इंतजार है। इस बीच, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के माध्यम से उन गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं जहां किसानों ने शारीरिक दिक्कतों की शिकायत की है. प्रशासन ने साफ किया है कि जैसे ही लैब रिपोर्ट प्राप्त होगी, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों या संबंधित कारणों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंदौर जल संकट पर भी प्रशासन की नजर

अमरोहा के साथ-साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में भी दूषित पानी से पैदा हुए संकट पर प्रशासन पैनी नजर रखे हुए है. इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की लाइनों और बोरवेल का सघन सर्वे किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रभावित परिवारों को 2-2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। वहां अब तक 18 लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है और अस्पतालों में भर्ती मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है. इंदौर के अधिकारियों का कहना है कि अब वहां मरीजों की संख्या में गिरावट आ रही है, लेकिन एहतियातन पूरे जिले में जल अवसंरचना की जांच जारी है.

सरकार की प्रतिबद्धता और निगरानी

मध्य प्रदेश के मंत्री इंदर सिंह परमार ने आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं अमरोहा में भी प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि पेयजल और सिंचाई के लिए सुरक्षित पानी सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है. स्थानीय विधायक और अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं ताकि जनता के बीच फैले डर को कम किया जा सके और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.