AI का घिनौना चेहरा! नीदरलैंड की राजकुमारी का फेक पोर्न VIDEO वायरल, FBI ने बंद कराई डीपफेक वेबसाइट्स
नीदरलैंड की भावी रानी, राजकुमारी कैथरीना-अमालिया, डीपफेक पोर्न हमले का शिकार हुई हैं, जिसमें AI का उपयोग करके उनके नकली अश्लील वीडियो ऑनलाइन फैलाए गए. FBI और डच अधिकारियों ने मिलकर इन वीडियो को फैलाने वाली वेबसाइटों को बंद करा दिया है, हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. हैरानी की बात यह है कि राजकुमारी ने अपनी यूनिवर्सिटी की थीसिस डीपफेक के कानूनी खतरों पर ही लिखी थी.
AI Deepfake Video:आजकल टेक्नोलॉजी जितनी मददगार है, उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती है. इसका एक ताजा उदाहरण नीदरलैंड (Netherlands) की भावी रानी, राजकुमारी कैथरीना-अमालिया (Princess Catharina-Amalia) के साथ हुई घटना है. 21 साल की राजकुमारी डीपफेक पोर्न हमले का शिकार हो गई हैं.
क्या है पूरा मामला?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके राजकुमारी के चेहरे को पोर्न फिल्मों के एक्टर्स के शरीर पर लगा दिया गया. इन नकली और आपत्तिजनक वीडियो को 'मिस्टरडीपफेक्स' जैसी वेबसाइटों पर फैलाया गया. यह एक बहुत ही गंभीर और शर्मनाक घटना है, जिसमें किसी की इमेज को खराब करने के लिए टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल किया गया है.
इस मामले में अमेरिका की जांच एजेंसी FBI और नीदरलैंड के अधिकारियों ने मिलकर कार्रवाई की. उन्होंने 'मिस्टरडीपफेक्स' समेत कई वेबसाइटों को बंद करवा दिया है. इन वेबसाइटों पर राजकुमारी के अलावा लगभग 70 और डच महिलाओं के डीपफेक पोर्न वीडियो भी मौजूद थे. हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
यह पहली बार नहीं है जब राजकुमारी को इस तरह के हमले का सामना करना पड़ा है. इससे पहले 2022 में भी उनके मॉर्फ किए गए वीडियो ऑनलाइन फैलाए गए थे.
कौन हैं राजकुमारी कैथरीना-अमालिया?
कैथरीना-अमालिया नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा की सबसे बड़ी बेटी हैं. वह अपने पिता के बाद नीदरलैंड की अगली रानी बनेंगी. उनका जन्म 7 दिसंबर 2003 को हुआ था और 2013 में उनके पिता के राजा बनने के बाद से उन्हें 'प्रिंसेस ऑफ ऑरेंज' का खिताब मिला हुआ है, जो सिंहासन के उत्तराधिकारी को दिया जाता है.
हैरानी की बात: राजकुमारी ने डीपफेक पर ही की थी पढ़ाई
इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राजकुमारी ने अपनी पढ़ाई में इसी मुद्दे पर रिसर्च की थी. उन्होंने एम्स्टर्डम यूनिवर्सिटी से राजनीति, मनोविज्ञान, कानून और अर्थशास्त्र (PPLE) में ग्रेजुएशन किया है. अपनी फाइनल थीसिस के लिए उन्होंने "डीपफेक बॉडीज" और AI कानूनों पर ही काम किया था. उन्होंने इस बात पर रिसर्च की थी कि AI से जुड़े कानून और यूरोपीय मानवाधिकारों के बीच क्या टकराव है.
यह एक बड़ी विडंबना है कि जिस खतरे के बारे में वह अकादमिक रूप से अध्ययन कर रही थीं, वह खुद उसी का शिकार बन गईं. यह घटना दिखाती है कि AI और डीपफेक टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कितना आसान और खतरनाक हो सकता है, चाहे पीड़ित कोई आम इंसान हो या शाही परिवार का सदस्य.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 21, 2025 01:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

