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जर्मनी में काफी बदल सकता है गोद लेने का कानून

जर्मनी में गोद लेने के नियमों में बड़े बदलाव हो सकते हैं.

जर्मनी में काफी बदल सकता है गोद लेने का कानून
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में गोद लेने के नियमों में बड़े बदलाव हो सकते हैं. ऐसा हुआ, तो अविवाहित जोड़े भी मिलकर बच्चा गोद ले पाएंगे. एक ही बच्चे की दो मांएं भी हो सकेंगी.'पैचवर्क' और 'रेनबो' फैमिली - ऐसे परिवार लंबे समय से जर्मनी में कई लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहे हैं. पैचवर्क फैमिली, ऐसे परिवारों को कहा जाता है जिनमें एक या दोनों पार्टनर पहले किसी रिश्ते/शादी में रहे हों और उससे उनका एक बच्चा भी हो और वे साथ मिलकर अपना एक परिवार बनाएं.

रेनबो, ऐसे परिवारों को कहा जाता है जिनमें दो समलैंगिक या जेंडर-डायवर्स लोग मिलकर बच्चा पालें. हालांकि, संघीय न्याय मंत्री और फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी (एफडीपी) के नेता मार्को बुशमान के मुताबिक, कानून "समाज की सच्चाई" से बेहद पीछे रह गए हैं.

बच्चा गोद लेने और परिवार से जुड़े कानूनों को लचीला बनाने की प्रस्तावित योजनाओं में इन बदलावों को शामिल किया जा सकता है. इस संबंध में राज्य के न्यायिक विभागों के प्रतिनिधियों को प्रस्तावित विधेयक का मसौदा भेजा गया है. साथ ही, उन्हें इस महीने सरकार द्वारा की जा रही एक वार्ता में शामिल होने का भी आमंत्रण दिया गया है.

प्रस्तावित कानूनी सुधारों के अंतर्गत, अब दो वयस्क लोग बिना शादी किए भी साथ मिलकर बच्चा गोद ले पाएंगे. किसी विवाहित संबंध में केवल एक ही वयस्क गोद लिए हुए बच्चे का कानूनी अभिभावक भी बन सकेगा. जर्मनी में विवाहित या गैर-शादीशुदा पारंपरिक (स्त्री-पुरुष) जोड़े या समलैंगिक जोड़े बच्चा गोद ले सकते हैं. हालांकि, विवाहित जोड़ों के मामलों में अगर वे बच्चा गोद लेते हैं, तो दोनों ही पार्टनरों को मिलकर कानूनी तौर पर अडॉप्ट करना होगा. वहीं, अविवाहित पार्टनरशिप की स्थिति में केवल एक ही सदस्य गोद लिए हुए बच्चे का कानूनी अभिभावक हो सकता है.

जर्मनी में अब आसान होगा कानूनी रूप से लिंग बदलना

'दी एसोसिएशन ऑफ फॉस्टर एंड एडॉप्टिव फैमिलीज इन जर्मनी' (पीएफएडी) ने गोद लेने के कानूनों में बदलाव का स्वागत किया है. संगठन ने कहा कि कानूनी सुधार "पारिवारिक जीवन की सच्चाई के मुताबिक" होने चाहिए. पीएफएडी के बर्लिन ऑफिस की प्रमुख कार्मन थील ने कहा, "मौजूदा समय में परिवारों की वास्तविकता दिखाती है कि शादी, स्थायित्व का वादा नहीं होता. पहले गोद लेने के कानूनों में यही माना जाता था."

जर्मनी में गोद लेने का क्या कानून है?

जर्मन कानूनों में 25 साल या इससे अधिक उम्र के वयस्क बच्चा गोद ले सकते हैं. शादीशुदा जोड़ों के लिए कम-से-कम एक पार्टनर का 25 साल का होना जरूरी है. इस स्थिति में जोड़े में जो कम उम्र वाला पार्टनर है, उसका कम-से-कम 21 साल का होना जरूरी है. गोद लेने के लिए अभिभावकों की कोई अधिकतम आयु तय नहीं है. हालांकि, नियम कहते हैं कि गोद लेने वाले अभिभावक और बच्चे के बीच उम्र का फासला "स्वाभाविक अंतर" पर होना चाहिए.

जर्मन दस्तावेजों में नाम और लिंग बदलना आसान होगा

सिंगल लोग भी बच्चा गोद ले सकते हैं, लेकिन चुनिंदा मामलों में ही इन आवेदनों पर विचार किया जाता है. मसलन, वयस्क और बच्चे के बीच पहले से ही लंबा रिश्ता रहा हो. एक पक्ष यह भी है कि जर्मनी में जिन बच्चों को गोद लिया जा सकता है, उनकी संख्या की तुलना में आवेदकों की संख्या काफी ज्यादा होती है. सभी मामलों में गोद लेने की योग्यता या मेल पर कई पक्षों की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाता है. इनमें जोड़े की पार्टनरशिप कितनी मजबूत है, गोद लेने के इच्छुक अभिभावकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, क्यों गोद लेना चाहते हैं, जीवनस्तर और वित्तीय स्थितियां शामिल हैं.

जो जोड़े बच्चा गोद लेना चाहते हैं, उन्हें अडॉप्शन एजेंसी में एक आवेदन देना होता है. ये एजेंसियां या तो स्थानीय युवा कल्याण विभागों द्वारा संचालित हो सकते हैं, या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अडॉप्शन सेवाएं जिनका प्रबंधन चर्च या गैर-धार्मिक संगठन करते हैं. अंतर्देशीय गोद लेने के मामले या आवेदन 1993 के 'हेग अडॉप्शन कन्वेंशन' के दायरे में आते हैं. यह साल 2002 से जर्मनी में भी लागू है.

लैंगिक पहचान को सीमित करता भाषा का 'लिंग'

106 देशों के इस समझौते में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ब्राजील, चीन और भारत शामिल हैं. इस समझौते में अंतर्देशीय गोद लेने के मामलों में प्रक्रिया स्पष्ट की गई है. साथ ही, अनुचित वित्तीय लाभ या किसी भी तरह के अन्य फायदे पर रोक लगाई गई है. बच्चों के अपहरण, खरीद-बिक्री या तस्करी जैसी आपराधिक चीजों पर सुरक्षा के नियम हैं.

अब एक बच्चे को मिल सकेंगी दो मांएं

विवाहित और अविवाहित जोड़ों के लिए गोद लेने के कानूनों में बदलाव के साथ ही, रिफॉर्म बिल में यह भी प्रावधान है कि बच्चे की जन्म के समय से ही दो मांएं हो सकेंगी. मौजूदा जर्मन कानूनों के तहत, किसी लेस्बियन जोड़े में बच्चे को जन्म देने वाली महिला की पार्टनर "स्टेपचाइल्ड अडॉप्शन" के माध्यम से उस बच्चे को गोद लेती है. यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है, जिसकी लंबे समय से आलोचना होती आ रही है. इस प्रक्रिया के दौरान आवेदक की गोद लेने की क्षमता का आकलन किया जाता है.

एलएसवीडी+ क्वियर डायवर्सिटी एसोसिएशन, जर्मना का सबसे बड़ा एलजीबीटीक्यू+ सिविल राइट्स संगठन है. इसने डीडब्ल्यू से कहा कि वह इस बात का स्वागत करता है. संगठन ने कहा कि इन सुधारों का लंबे समय से इंतजार था और आश्वासन भी दिए गए थे. एलएसवीडी+ के बोर्ड मेंबर पाट्रिक डॉर ने एक बयान में डीडब्ल्यू से कहा, "दो मांओं के परिवार में स्टेपचाइल्ड अडॉप्शन की तकलीफें खत्म की जानी चाहिए. आखिरकार, रेनबो परिवारों के बच्चों को जन्म से ही दो अभिभावकों का अधिकार है, भले उनका लिंग कुछ भी हो."

पिता होने से जुड़े कानूनों के अंतर्गत, फिलहाल कानूनी रूप से एक बच्चे के दो पिता नहीं हो सकते. कानूनी तौर पर पिता वही है जो या तो बच्चे का बायोलॉजिकल पिता है, या फिर मां का पार्टनर जो उस बच्चे के साथ "सामाजिक-पारिवारिक रिश्ते" में है. जिन बच्चों के अभिभावक गे हैं, उनमें से एक पिता होना स्वीकार कर सकता है. दूसरा पार्टनर स्टेपचाइल्ड अडॉप्शन से बच्चे को गोद ले सकता है. प्रस्तावित कानूनी सुधारों में यह नियम नहीं बदलेगा. जर्मन कानूनों में बायोलॉजिकल मां के अलावा केवल एक भी और अभिभावक हो सकता है.

आधुनिक पारिवारिक ढांचों के मुताबिक कानून में बदलाव नहीं

दुनियाभर की कानूनी व्यवस्थाएं आधुनिक परिवार के बदलते ढांचों के मुताबिक बदलाव नहीं कर रही हैं. अमेरिका में, जहां कि गोद लेना बहुत हद तक कानून द्वारा संचालित है, सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में फैसला दिया कि समलैंगिक विवाहों में दोनों पार्टनरों के पास अधिकार है कि बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर बतौर अभिभावक उनका नाम दर्ज हो. कैलिफोर्निया जैसे कुछ ही राज्य हैं जहां बच्चों के कानूनी अभिभावक दो से ज्यादा हो सकते हैं.

परिवार के विकल्प तलाशता जर्मन समाज

कनाडा में कई अदालती फैसलों ने माना कि बच्चे के कानूनी अभिभावकों की संख्या दो से ज्यादा हो सकती है. यूरोपीय देशों में फिलहाल दो से ज्यादा कानूनी अभिभावकों वाले परिवारों को मान्यता नहीं दी गई है. नीदरलैंड्स में स्टेट कमीशन ने 2016 से कानून में सुधार कर मल्टी-पैरेंटहुड को मान्यता देने की अनुशंसा की थी. मल्टी-पैरेंटहुड की इस व्यवस्था में अधिकतम दो परिवार और चार अभिभावक हो सकते थे. हालांकि, आने वाली सरकारों ने इस मामले पर अलग नजरिया दिखाया और अब तक कानून में बदलाव नहीं हुआ है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 11, 2024 03:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).