Mobile Phone Addiction in Children: स्मार्टफोन की लत 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए घातक, आंखों से परे होता है इसका असर
10 साल से कम उम्र के बच्चों में स्मार्टफोन की लत आंखों के लिए हानिकारक मानी जाती है. हालांकि डॉक्टरों ने शनिवार को चेतावनी दी कि डिवाइस पर अत्यधिक समय बिताने से शारीरिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है और व्यवहार संबंधी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
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Mobile Phone Addiction in Children: 10 साल से कम उम्र के बच्चों में स्मार्टफोन की लत आंखों के लिए हानिकारक मानी जाती है. हालांकि डॉक्टरों ने शनिवार को चेतावनी दी कि डिवाइस पर अत्यधिक समय बिताने से शारीरिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है और व्यवहार संबंधी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) यानी डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन देखने में कम समय बिताना चाहिए, जबकि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य निकाय शिशुओं और 1 वर्ष के बच्चों के लिए स्क्रीन समय की अनुशंसा नहीं करता है. इसके साथ ही बताया गया है कि 2 वर्ष की आयु वालों को एक घंटे से अधिक समय तक स्क्रीन के संपर्क में नहीं रहना चाहिए.
हालांकि मेदांता द मेडिसिटी (Medanta The Medicity), गुरुग्राम के पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर पीडियाट्रिक्स (पीआईसीयू) (Paediatric Pulmonology, Critical Care Paediatrics) पीडियाट्रिक केयर के निदेशक डॉ. राजीव उत्तम (Dr Rajiv Uttam) ने आईएएनएस को बताया- यहां तक कि डेढ़ साल की उम्र के बच्चों को भी उनके माता-पिता स्मार्टफोन थमा रहे हैं. यह भी पढ़ें: Oxygen Deficiency In Newborns : नवजात बच्चों में ऑक्सीजन की कमी के इलाज के लिए कारगर साबित हो सकती है वियाग्रा
डॉक्टर ने कहा कि डायरिया, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उन बच्चों में देखी जाती हैं जो स्मार्टफोन जैसे गैजेट्स पर अत्यधिक समय बिताते हैं. कई अध्ययनों से पता चला है कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल से आंखों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बच्चों में लंबे समय तक स्मार्टफोन का उपयोग दृष्टि हानि और सूखी आंखों सहित अन्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है.
द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल के बाल रोग सलाहकार डॉ. विकास तनेजा ने बताया कि यह मुख्य रूप से विकिरण के कारण होता है, क्योंकि बच्चे अपने मोबाइल फोन का उपयोग बहुत करीब से करते हैं. इससे बच्चों की आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिससे आंखें लाल हो सकती हैं और अत्यधिक खुजली हो सकती है. इससे बार-बार रगड़ने और पानी आने की समस्या हो सकती है. आंखों में तनाव के कारण सिरदर्द हो सकता है और उनकी नींद में खलल पड़ सकता है. अत्यधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आंखों में परेशानी हो सकती है. इसके इस्तेमाल से आंख की मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
नींद की यह कमी आगे चलकर बहुत अधिक चिंता और अवसाद का कारण बन सकती है. आमतौर पर ऐसे बच्चे अकेले रहते हैं, उनका आत्म-सम्मान कम होता है, वे अत्यधिक चिड़चिड़े हो जाते हैं, उनमें बहुत अधिक आक्रामकता और व्यवहार परिवर्तन होते हैं और वे नखरे कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: Type 2 Diabetes: बच्चों में बढ़ रहा है टाइप 2 मधुमेह का खतरा- विशेषज्ञ
डॉ. राजीव उत्तम ने कहा कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से अक्सर वास्तविक दुनिया से अलगाव हो जाता है और बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म जैसे लक्षण प्रदर्शित होने की संभावना होती है. भोजन के दौरान आदतन स्मार्टफोन का उपयोग खराब खाने की आदतों, मोटापे, उच्च रक्तचाप और शर्करा के स्तर जैसे संबंधित स्वास्थ्य मुद्दों में भी योगदान देता है, जो अंततः छोटे बच्चों को प्री-डायबिटिक चरण में ले जाता है. डॉक्टर ने कहा, महत्वपूर्ण बात यह है कि दृश्य हानि और ध्यान की कमी इन चिंताओं को और बढ़ा देती है, जब तक अकादमिक प्रदर्शन खराब नहीं हो जाता, तब तक अक्सर इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता.
बहरहाल, स्मार्टफोन के इस्तेमाल से 10 से कम उम्र के बच्चों में होने वाले इन जोखिमों को कम करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता-पिता को अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को प्राथमिकता देने, स्वस्थ खान-पान की आदतों को प्रोत्साहित करने और प्रतिदिन स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करने की सलाह दी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 10, 2024 09:32 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

