NASA की पूर्व वैज्ञानिक का खुलासा: तीन बार 'मौत' के करीब जाकर लौटीं डॉ. इनग्रिड होंकला, बताया मरने के बाद क्या होता है
नासा की पूर्व समुद्र विज्ञानी डॉ. इनग्रिड होंकला ने अपने तीन 'नियर-डेथ एक्सपीरियंस' साझा करते हुए चेतना के रहस्यों पर नई बहस छेड़ दी है. उनका दावा है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि चेतना का एक नया विस्तार है.
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वॉशिंगटन, 6 मई: नासा (NASA) की पूर्व समुद्र विज्ञानी (Former NASA Oceanographer) और समुद्री जीवविज्ञानी (Marine Biologist) डॉ. इनग्रिड होंकला (Dr Ingrid Honkala) ने अपने जीवन के उन अनुभवों को साझा किया है, जो विज्ञान की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देते हैं. 55 वर्षीय डॉ. होंकला ने अपने तीन 'नियर-डेथ एक्सपीरियंस' (Near-Death Experiences) (NDE) यानी मौत के बेहद करीब पहुंचने के अनुभवों के आधार पर दावा किया है कि चेतना (Consciousness) केवल मस्तिष्क की उपज नहीं है, बल्कि वास्तविकता की एक मूलभूत परत है. उनके अनुसार, मृत्यु के करीब होने का अनुभव भौतिक इंद्रियों से परे वास्तविकता की गहराई में प्रवेश करने जैसा था. यह भी पढ़ें: NASA Artemis II Mission: नासा के आर्टेमिस II मिशन की ऐतिहासिक वापसी; आज प्रशांत महासागर में होगी अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग
बचपन में मौत से पहला सामना
डॉ. होंकला का पहला अनुभव तब हुआ जब वह महज दो साल की थीं. बोगोटा में अपने घर के पास एक ठंडे पानी के टैंक में गिरने के कारण वह डूब गई थीं. अपनी किताब 'ए ब्राइटली गाइडेड लाइफ' (A Brightly Guided Life) में उन्होंने बताया कि डूबते समय घबराहट की जगह अचानक एक असीम शांति ने ले ली थी. उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उन्होंने अपने शरीर से बाहर निकलकर अपनी माँ को काम पर जाते देखा और एक मूक संदेश के जरिए उन्हें सचेत किया, जिससे उनकी जान बच सकी.
वैज्ञानिक करियर और आध्यात्मिक जागृति
इन अनुभवों के बावजूद डॉ. होंकला ने अपनी पूरी जिंदगी वैज्ञानिक शोध के प्रति समर्पित रखी और समुद्री विज्ञान में पीएचडी (PhD) हासिल की. उन्होंने नासा और अमेरिकी नौसेना के साथ काम किया और लंबे समय तक अपने इन अनुभवों को सार्वजनिक नहीं किया. हालांकि, समय के साथ उन्होंने पाया कि विज्ञान और आध्यात्मिकता एक ही रहस्य को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखने के तरीके हैं. उन्होंने कहा कि विज्ञान शोध के माध्यम से वास्तविकता को समझता है, जबकि आध्यात्मिकता उसे अनुभव के माध्यम से देखती है.
चेतना का निरंतर प्रवाह
डॉ. होंकला ने अपने जीवन में दो बार और मृत्यु का सामना किया—एक बार 25 साल की उम्र में मोटरसाइकिल दुर्घटना के दौरान और दूसरी बार 52 साल की उम्र में सर्जरी के दौरान हुई जटिलता के समय. दोनों ही बार उन्होंने उसी शांत और अंतर्संबंधित चेतना का अनुभव किया. उनका मानना है कि हम केवल जीवित रहने के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि हम भौतिक रूप के माध्यम से जीवन का अनुभव करने वाली चेतना की ही अभिव्यक्ति हैं. यह भी पढ़ें: नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन: 50 साल बाद फिर चंद्रमा की ओर रवाना होंगे इंसान, आज होगा लॉन्च
विरासत और वर्तमान कार्य
आज डॉ. इनग्रिड होंकला एक अंतरराष्ट्रीय वक्ता और लेखिका हैं. उनकी नवीनतम कृति 'डाइंग टू सी द लाइट' (Dying to See the Light) लोगों को बिना किसी संकट के आंतरिक शांति पाने का मार्ग दिखाती है. वह वर्तमान में अमेरिका में रहकर अपने वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के बीच सेतु बनाने का कार्य कर रही हैं. हालांकि कई शोधकर्ता इन अनुभवों को मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी या मतिभ्रम मानते हैं, लेकिन होंकला अपने अनुभवों को एक शाश्वत सत्य के रूप में देखती हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on May 06, 2026 12:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

