NASA Artemis II Mission: नासा के आर्टेमिस II मिशन की ऐतिहासिक वापसी; आज प्रशांत महासागर में होगी अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग
नासा का आर्टेमिस II मिशन (Photo Credits: X/@NASA)

NASA Artemis II Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (American Space Agency) नासा (NASA) ने मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight)  के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की पुष्टि की है. 1 अप्रैल को लॉन्च हुआ ऐतिहासिक 'आर्टेमिस II' (Artemis II) मिशन अब अपने सफर के अंतिम चरण में है. नासा के अनुसार, चंद्रमा की परिक्रमा करने के बाद अंतरिक्ष यान धरती की ओर बढ़ रहा है और शुक्रवार, 10 अप्रैल को पूर्वी समयानुसार (ET) रात लगभग 8:07 बजे प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में 'स्प्लैशडाउन' (Splashdown) (लैंडिंग) करेगा. यह भी पढ़ें: अंतरिक्ष से पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें: नासा के Artemis II Mission में आईफोन 17 प्रो मैक्स का कमाल; देखें ओरियन यान से ली गई झलक

पांच दशकों बाद गहरा अंतरिक्ष अन्वेषण

यह मिशन वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है क्योंकि पांच दशकों से भी अधिक समय के बाद मानवता ने पृथ्वी की निचली कक्षा से परे गहरे अंतरिक्ष में कदम रखा है. नासा ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसने अंतरिक्ष यात्रियों को अब तक के किसी भी मानव मिशन की तुलना में सबसे अधिक दूरी तक पहुँचाया है. यह मिशन भविष्य के चंद्र अन्वेषणों का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

टूटा अपोलो 13 का रिकॉर्ड

इस मिशन के दौरान चार सदस्यीय चालक दल—रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन—ने पृथ्वी से 248,655 मील की दूरी तय कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया. अपनी यात्रा के सबसे दूर बिंदु पर वे लगभग 252,756 मील की दूरी तक पहुँचे. यह उपलब्धि अपोलो 13 मिशन द्वारा बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया मानक स्थापित करती है. यह भी पढ़ें: NASA का ऐतिहासिक मिशन: पृथ्वी की कक्षा छोड़ चांद की ओर बढ़ा Artemis II, 50 साल बाद चंद्रमा के करीब पहुंचेंगे इंसान

भविष्य के मून मिशन का आधार

10 दिवसीय आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) रॉकेट और 'ओरियन' अंतरिक्ष यान का गहरे अंतरिक्ष वातावरण में परीक्षण करना था. मिशन के दौरान किया गया 'लूनर फ्लाईबी' (चंद्रमा के पास से गुजरना) उन प्रणालियों की पुष्टि करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, जो भविष्य में मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस उतारने के मिशनों का समर्थन करेंगी.

नासा का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्रमा पर मनुष्यों की निरंतर उपस्थिति स्थापित करना है. अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन के अनुसार, यह उपलब्धि पूर्व अंतरिक्ष अग्रदूतों की विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ अन्वेषण का एक नया अध्याय शुरू करती है.