Eta Aquariids 2026: मई की सबसे शानदार उल्कावृष्टि (Meteor Shower) इस दिन होगी चरम पर, जानें भारत में देखने का सही समय
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

Eta Aquariids 2026: खगोल प्रेमियों के लिए मई का महीना एक अद्भुत सौगात लेकर आ रहा है. साल की सबसे तेज और चमकदार उल्कावृष्टि में से एक, 'एटा एक्वेरिड्स' (Eta Aquariids), मई के पहले सप्ताह में अपने चरम पर होगी. 6 मई 2026 को यह खगोलीय घटना (Astronomical Phenomenon) अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगी, जिसमें प्रति घंटे 50 तक टूटते हुए तारे देखे जा सकते हैं. हालांकि, इस साल चंद्रमा की तेज रोशनी देखने के अनुभव में थोड़ी बाधा डाल सकती है, लेकिन भोर के शांत घंटों में यह नजारा देखने लायक होगा. यह भी पढ़ें: Lyrid Meteor Shower 2026: भारत के आसमान में दिखेगा ‘लिरिड उल्का बौछार’ का अद्भुत नजारा; जानें दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में देखने का सही समय

कब और कहां दिखेगा सबसे अच्छा नजारा?

एटा एक्वेरिड्स उल्कावृष्टि 19 अप्रैल से शुरू होकर 28 मई तक सक्रिय रहती है, लेकिन इसके चरम पर होने की भविष्यवाणी 6 मई को की गई है. देखने के लिए सबसे अच्छा समय 4 मई से 7 मई के बीच भोर (सूर्योदय से ठीक पहले) का होगा.

खगोलीय रूप से यह उल्कावृष्टि दक्षिणी गोलार्ध (जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका) में सबसे स्पष्ट दिखाई देती है. उत्तरी गोलार्ध और भारत के दक्षिणी हिस्सों में भी यह दिखाई देगी, हालांकि यहां प्रति घंटे लगभग 10 से 15 उल्काएं ही दिखने की उम्मीद है क्योंकि इसका रेडिएंट (उद्गम केंद्र) क्षितिज के काफी नीचे रहता है.

हैली धूमकेतु का अवशेष है यह आतिशबाजी

एटा एक्वेरिड्स का जनक प्रसिद्ध 'हैली धूमकेतु' (1P/Halley) है। जब पृथ्वी इस धूमकेतु द्वारा छोड़े गए मलबे और धूल के कणों के बीच से गुजरती है, तो ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण के कारण जल उठते हैं. ये उल्काएं अपनी अत्यधिक गति और पीछे छोड़ने वाली चमकदार रेखाओं (trails) के लिए जानी जाती हैं, जो आकाश में कुछ सेकंड तक टिकी रह सकती हैं.

चंद्रमा की रोशनी बन सकती है बाधा

साल 2026 में, उल्कावृष्टि का चरम पूर्णिमा के केवल पांच दिन बाद हो रहा है. चंद्रमा लगभग 83% चमकीला होगा, जिसकी रोशनी के कारण धुंधली उल्काएं दिखाई नहीं देंगी. बेहतर अनुभव के लिए खगोलविदों की सलाह है कि आप किसी ऐसी जगह का चुनाव करें जहां चंद्रमा की सीधी रोशनी किसी इमारत या ऊंचे पेड़ के पीछे छिपी हो.

देखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स

  • सही समय: इसे देखने का सबसे उत्तम समय सुबह 3:00 बजे से सूर्योदय के बीच का होता है.
  • दिशा: उल्काएं 'कुंभ' (Aquarius) नक्षत्र की ओर से आती हुई प्रतीत होंगी, लेकिन ये पूरे आकाश में कहीं भी दिख सकती हैं.
  • धैर्य रखें: आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए कम से कम 20-30 मिनट का समय दें। किसी भी तरह की स्क्रीन या मोबाइल टॉर्च का उपयोग न करें.
  • शहर की लाइटों से दूर: सबसे अच्छा नजारा शहर की कृत्रिम रोशनी से दूर किसी अंधेरे स्थान पर दिखाई देगा.

आकाश में होने वाली इस प्राकृतिक आतिशबाजी का आनंद लेने के लिए किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की आवश्यकता नहीं है; इसे नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है.