इलॉन मस्क की अपील को कोर्ट ने खारिज किया है कि ओपन एआई मुनाफा कमाने के लिए अपने बुनियादी मूल्यों के खिलाफ जा रहा है. लेकिन असल जीत-हार का सवाल इससे कहीं ऊपर है.अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित ऑकलैंड फेडरल कोर्ट में सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसले में जूरी ने इलॉन मस्क द्वारा दायर मुकदमे को खारिज कर दिया. मस्क ने आरोप लगाया था कि ओपन एआई ने अपने मूल उद्देश्य यानी "मानवता के हित में सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकसित करने" से भटककर मुनाफे की राह पकड़ ली है.
नौ सदस्यीय जूरी ने इस मामले में दो घंटे से भी कम समय में विचार-विमर्श कर फैसला ले लिया. जूरी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ओपन एआई मानवता के हित में काम करने के अपने मूल उद्देश्य से भटकने के आरोपों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं है. इस फैसले में जूरी ने माना कि मस्क ने यह मुकदमा बहुत देर से दायर किया है. अदालत के अनुसार, मस्क को ओपन एआई की कारोबारी योजनाओं की जानकारी कई सालों पहले ही थी इसलिए अगस्त 2024 में दायर की गई उनकी याचिका कानूनी समय सीमा से बाहर थी. यह फैसला ओपन एआई के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे कंपनी के संभावित आईपीओ (यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) का रास्ता लगभग साफ हो गया है. विश्लेषकों के मुताबिक ओपन एआई की वैल्यूएशन एक हजार अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो कि टेक इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा.
फैसले के बाद भी मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. मस्क का आरोप है कि सैम ऑल्टमैन और ग्रेग ब्रॉकमैन ने एक "चैरिटी” को निजी मुनाफे की मशीन में बदल दिया. उन्होंने लिखा, "ऑल्टमैन और ब्रॉकमैन ने असल में एक चैरिटी को लूटकर खुद को अमीर बनाया. अब सिर्फ सवाल यह है कि उन्होंने यह कब किया!” उन्होंने आगे लिखा, "चैरिटी संस्थाओं को लूटने की ऐसी मिसाल कायम करना अमेरिका में दान और परोपकार की भावना के लिए बेहद विनाशकारी है.” वहीं अदालत की अध्यक्षता कर रहीं जज यवोन गोंजालेज रोजर्स ने संकेत दिया कि अपील में भी मस्क की राह आसान नहीं होगी. जज ने कहा, "जूरी के फैसले का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, यही वजह है कि मैंने उसी समय इस मामले को खारिज कर दिया.”
मुनाफे की लड़ाई
मुकदमे के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए. मस्क का कहना था कि उन्होंने 2015 में ओपन एआई को एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित करने में मदद की थी ताकि एआई तकनीक मानवता के हित में विकसित हो सके. लेकिन बाद में कंपनी ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाकर खुद को मुनाफा कमाने वाली संस्था में बदल लिया. मस्क के वकीलों ने अदालत में दावा किया कि ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने निवेशकों और सह-संस्थापकों को गुमराह किया है. कई पूर्व कर्मचारियों और बोर्ड सदस्यों ने भी ऑल्टमैन की ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं. मुकदमे के दौरान यह भी सामने आया कि 2023 में ऑल्टमैन को कुछ समय के लिए कंपनी बोर्ड से भी हटाया गया था क्योंकि उनके व्यवहार और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं बढ़ रही थी.
दूसरी तरफ ओपन एआई ने मस्क के आरोपों को "प्रतिद्वंद्वी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश” करार दिया. कंपनी के वकीलों का कहना था कि मस्क खुद एआई बाजार में अपनी कंपनी एक्स एआई के जरिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और यह मुकदमा उसी कारोबारी लड़ाई का ही एक हिस्सा है. ओपन एआई के वकील विलियम सैविट ने अदालत के बाहर कहा, "जूरी के इस फैसले ने साबित कर दिया है कि यह मुकदमा एक प्रतिस्पर्धी कंपनी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी.” उन्होंने आगे कहा, "मस्क अपने दावे कर सकते हैं और अपनी कहानियां सुना सकते हैं, लेकिन इस जूरी के नौ सदस्यों ने पाया कि उनकी बातें सिर्फ कहानियां ही थी, कोई तथ्य नहीं.”
अमेरिकी वित्तीय सेवा और निवेश कंपनी वेडबुश के विश्लेषक डैन आइव्स ने कहा कि इस फैसले से ओपन एआई के संभावित आईपीओ पर मंडरा रहा बड़ा कानूनी खतरा खत्म हो गया है. उन्होंने कहा, "ऑल्टमैन की छवि और नेतृत्व पर लगे दाग के बावजूद यह फैसला उनके और ओपन एआई के लिए एक बड़ी जीत है.” इस मामले में माइक्रोसॉफ्ट पर भी सहयोग और समर्थन देने के आरोप लगे थे. माइक्रोसॉफ्ट के एक अधिकारी ने गवाही में बताया कि कंपनी ने ओपन एआई के साथ साझेदारी पर लगभग 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए हैं.
असल नुकसान किसका?
जज गोंजालेज रोजर्स ने मुकदमे की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह इस सुनवाई को एआई के खतरों पर बहस में नहीं बदलना चाहती हैं. इसके बावजूद नौकरी छिनने, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और यहां तक कि मानव अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे जैसे एआई से जुड़े अनसुलझे सवाल पूरे मुकदमे के दौरान पृष्ठभूमि में बने रहे.
फेडरल कोर्ट के बाहर लगातार प्रदर्शनकारी जुटते रहे, जो मस्क और ऑल्टमैन दोनों के खिलाफ नारे लगा रहे थे. प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों पर लिखा था कि इस लड़ाई में असली नुकसान आम लोगों का हो रहा है, जिनकी जिंदगी ऐसे उद्योग के कारण बदल रही है. जिसका नियंत्रण केवल कुछ अरबपतियों तक सीमित है. एक तरफ कंपनियां एआई से अरबों डॉलर कमाने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग नौकरी जाने, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, निगरानी तकनीक और फेक कंटेंट जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
कोलंबिया लॉ स्कूल की प्रोफेसर डोरोथी लुंद ने कहा, "यह मौजूदा दौर की एक अजीब तस्वीर पेश करता है, जहां इतनी महत्वपूर्ण तकनीक सरकारों की पहल के बजाय मस्क और ऑल्टमैन जैसे अरबपतियों की मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के हाथों बनाई जा रही है.”
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि सामाजिक शक्ति भी बन चुका है. शिक्षा, पत्रकारिता, चिकित्सा, कानून और रोजगार जैसे क्षेत्रों में इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जबकि इसपर नियंत्रण का अधिकार केवल कुछ गिने-चुने कॉर्पोरेट समूहों और व्यक्तियों के हाथों में सिमटता जा रहा है.
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की टेक पॉलिसी विशेषज्ञ सारा क्रेप्स के अनुसार, यह मुकदमा केवल मस्क और ऑल्टमैन के बीच का विवाद नहीं था, बल्कि यह विवाद उस दूरी के बारे में भी है, जो एआई बनाने वाले शक्तिशाली लोगों और उससे प्रभावित होने वाली आम जनता के बीच बढ़ती जा रही है.













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