भोपाल, 19 मई (आईएएनएस): मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर सियासी पारा गरमा गया है. राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार (BJP Government) पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस ने मांग की है कि प्रदेश की जनता को महंगाई से राहत देने के लिए ईंधन की कीमतों में तुरंत 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की जाए. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अंतर्राष्ट्रीय कारणों के बजाय राज्य सरकार द्वारा वसूला जा रहा अत्यधिक टैक्स इस भारी मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण है. यह भी पढ़ें: Vegetable-Fruit Prices Hike in Mumbai: ईंधन के दाम बढ़ते ही मुंबई में बढ़े फल और सब्जियों के दाम, विक्रेता समेत आम जनता परेशान; जानें लोगों ने क्या कहा
एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़े दाम: कमलनाथ
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक बयान जारी कर कहा कि महज एक सप्ताह के भीतर ईंधन की दरों में दोबारा बढ़ोतरी की गई है. मंगलवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है.
कमलनाथ ने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए कहा, 'सरकार इस मूल्य वृद्धि के पीछे अंतर्राष्ट्रीय कारणों और बाहरी परिस्थितियों का हवाला दे रही है. लेकिन सच यह है कि मध्यप्रदेश की जनता के लिए बाहरी कारकों से कहीं ज्यादा बड़ा कारण राज्य सरकार द्वारा लगाया गया भारी टैक्स ढांचा है.'
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के दामों में बड़ा अंतर
पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश (UP) के बीच ईंधन की कीमतों में मौजूद बड़े अंतर को रेखांकित किया. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्यप्रदेश में पेट्रोल औसतन ₹13 प्रति लीटर और डीजल ₹4 प्रति लीटर महंगा बिक रहा है.
उन्होंने राज्य के टैक्स ढांचे को स्पष्ट करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट (VAT) के साथ ₹2.5 और 1 प्रतिशत का उपकर (Cess) वसूलती है. वहीं, डीजल पर 19 प्रतिशत वैट के साथ ₹1.5 और 1 प्रतिशत का उपकर लगाया जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि राज्य के नागरिक पेट्रोल पर ₹30 से अधिक और डीजल पर ₹20 से अधिक का टैक्स सीधे राज्य सरकार को दे रहे हैं, जिसका वैश्विक परिस्थितियों से कोई लेना-देना नहीं है.
भोपाल समेत प्रमुख शहरों में ईंधन के नए दाम
मंगलवार को हुई ताजा बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं:
- भोपाल: पेट्रोल ₹110.75 प्रति लीटर और डीजल ₹95.91 प्रति लीटर.
- उज्जैन: पेट्रोल का दाम ₹111 के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल ₹96.40 प्रति लीटर मिल रहा है.
- इंडोर और जबलपुर: दोनों शहरों में पेट्रोल ₹110.79 प्रति लीटर; इंदौर में डीजल ₹95.97 और जबलपुर में ₹95.98 प्रति लीटर.
- ग्वालियर: पेट्रोल ₹110.69 प्रति लीटर और डीजल ₹95.86 प्रति लीटर.
राजस्व को भी हो रहा नुकसान
कमलनाथ ने दावा किया कि अत्यधिक कीमतों के कारण राज्य के खजाने (राजस्व) को भी भारी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि डीजल महंगा होने के कारण ट्रक ऑपरेटर और अन्य भारी वाहनों के मालिक मध्यप्रदेश के बजाय पड़ोसी राज्यों (जैसे यूपी) से ईंधन भरवाना पसंद करते हैं. इसके अलावा, सीमावर्ती जिलों में रहने वाले आम नागरिक भी सीमा पार जाकर पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं, जिससे राज्य का व्यापार प्रभावित हो रहा है. यह भी पढ़ें: India Revises Fuel Export Duties: मोदी सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाई, डीजल और ATF पर शुल्क घटाया
मध्यम वर्ग और किसानों पर चौतरफा मार: जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की. उन्होंने लिखा, "महज चार दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3.90 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है, और भाजपा सरकार अब भी मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के झूठे दावे कर रही है.'
पटवारी ने आगे कहा कि ईंधन के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर घरेलू बजट बिगड़ रहा है, खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है और गरीब की रसोई सहित मध्यम वर्ग का जीना दूभर हो गया है. कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने टैक्स कम कर ₹10 की तत्काल राहत नहीं दी, तो वे इसके खिलाफ सड़क पर उतरेंगे.













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