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मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: व्यभिचार साबित करने के लिए शारीरिक संबंध का सीधा सबूत जरूरी नहीं, परिस्थितियों के आधार पर मिल सकती है तलाक

मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में व्यभिचार को साबित करने के लिए शारीरिक संबंधों का प्रत्यक्ष या सीधा सबूत होना अनिवार्य नहीं है. कोर्ट ने माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य विवाह विच्छेद के लिए पर्याप्त कानूनी आधार बन सकते हैं.

मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: व्यभिचार साबित करने के लिए शारीरिक संबंध का सीधा सबूत जरूरी नहीं, परिस्थितियों के आधार पर मिल सकती है तलाक
मद्रास हाईकोर्ट (Photo Credits: File Image)

चेन्नई, 19 मई: मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने वैवाहिक मामलों को लेकर एक दूरगामी फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में व्यभिचार (Adultery) को साबित करने के लिए यौन संबंधों (Sexual Relations) का प्रत्यक्ष या सीधा सबूत (Direct Evidence) होना कोई पूर्ण या अनिवार्य आवश्यकता नहीं है. जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस के. राजशेखर की खंडपीठ ने कहा कि परिस्थितिजन्य कारक, जैसे कि समाज में दो लोगों की अत्यधिक निकटता और प्रभावित जीवनसाथी द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायतें, शादी को भंग करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार प्रदान कर सकती हैं. यह निर्णय अदालतों द्वारा बेवफाई की गुप्त प्रकृति और प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाहों की मांग की अव्यावहारिकता को स्वीकार करता है. यह भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला: 'एग्रेसिव सेक्स' के दौरान मौत के आरोपी को मिली जमानत; सबूतों के अभाव को बताया मुख्य आधार

व्यभिचार एक गुप्त कृत्य, प्रत्यक्ष सबूत मिलना असंभव: कोर्ट

उच्च न्यायालय ने उन प्रणालीगत कठिनाइयों को रेखांकित किया जिनका सामना याचिकाकर्ताओं को शारीरिक अंतरंगता के प्रत्यक्ष फोटोग्राफिक या गवाह संबंधी सबूत जुटाने के दौरान करना पड़ता है. खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कानून को वास्तविक होना चाहिए और सुनवाई के दौरान असंभव मानकों की मांग नहीं करनी चाहिए.

अदालत ने टिप्पणी की, "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्यभिचार अपने आप में एक गुप्त कृत्य है. व्यभिचार या यौन संबंधों के मुद्दे पर कोई भी सीधा सबूत पेश करना बेहद कठिन और असाधारण रूप से असंभव है." हालांकि न्यायाधीशों ने स्वीकार किया कि तलाक की डिक्री के लिए विवाहेतर संबंध की कानूनी स्थापना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए केवल उचित और तार्किक अनुमानों (Reasonable Inference) पर ही भरोसा करना होगा.

फैमिली कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट ने पलटा

यह ऐतिहासिक फैसला एक पति द्वारा दायर की गई अपील पर आया है, जिसने निचली पारिवारिक अदालत (Family Court) के आदेश को चुनौती दी थी. पारिवारिक अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) के तहत उसकी शादी को भंग करने से इनकार कर दिया था, जो जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्वैच्छिक शारीरिक संबंध के आधार पर तलाक की अनुमति देती है. निचली अदालत ने याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि पति का साक्ष्य शारीरिक संबंध को पूरी तरह साबित करने में विफल रहा.

इसके बाद पति ने उच्च न्यायालय में परिस्थितियों से जुड़े कई साक्ष्य एक साथ प्रस्तुत किए:

  • सार्वजनिक निकटता: कई स्वतंत्र गवाहों के बयान, जिन्होंने पत्नी और सह-प्रतिवादी (प्रेमी) को स्थानीय स्कूल और अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बेहद करीब देखा था.
  • तस्वीरें: एक गवाह द्वारा प्रस्तुत की गई तस्वीर जिसमें दोनों व्यक्ति एक साथ काफी करीब बैठे हुए दिखाई दे रहे थे.
  • तीसरे पक्ष का समर्थन: सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य सह-प्रतिवादी की अपनी पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक पुलिस शिकायत थी, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके पति के इस महिला (याचिकाकर्ता की पत्नी) के साथ संबंधों के कारण उसके अपने वैवाहिक जीवन में भारी कलह पैदा हो गई है.

उच्च न्यायालय ने इस पुलिस शिकायत को एक महत्वपूर्ण पुख्ता सामग्री के रूप में स्वीकार किया, जिसने पति के प्राथमिक आरोपों का पुरजोर समर्थन किया. यह भी पढ़ें: Wife Drinking Alcohol Divorce Case: पत्नी का शराब पीना क्रूरता नहीं है, जब तक कि वह अनुचित और असभ्य व्यवहार न करे, HC ने तलाक को दी मंजूरी

CRPF में नौकरी भी बनी फैसले का आधार

इस संबंध की संभावना का मूल्यांकन करते हुए, खंडपीठ ने पति की व्यावसायिक पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखा. अपीलकर्ता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में कार्यरत है, जिसके कारण उसे वर्ष में केवल कुछ ही बार छुट्टी मिलती है और वह लंबे समय तक अपने वैवाहिक घर से दूर तैनात रहता है.

अदालत ने नोट किया कि पति की लंबी परिचालन अनुपस्थिति (Operational Absence) यह समझने के लिए एक प्रासंगिक पर्यावरणीय कारक थी कि यह अवैध संबंध कैसे विकसित हुआ. साक्ष्यों के समग्र विश्लेषण के बाद, खंडपीठ इस निष्कर्ष पर पहुँची कि परिस्थितियों के आधार पर इस संबंध की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने माना कि पारिवारिक अदालत ने अप्राकृतिक और असंभव सबूतों की मांग करके गलती की थी, इसलिए निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए औपचारिक रूप से तलाक को मंजूरी दे दी गई.

(The above story first appeared on LatestLY on May 19, 2026 03:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).