बाधाओं के बावजूद कोडिंग कर रहे हैं गाजा के डिजिटल वर्कर
संघर्ष और अस्थिरता के माहौल में भी गाजा के युवा डिजिटल अपने कामकाज और कोडिंग के जरिए वैश्विक बाजार से जुड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं.
संघर्ष और अस्थिरता के माहौल में भी गाजा के युवा डिजिटल अपने कामकाज और कोडिंग के जरिए वैश्विक बाजार से जुड़े रहने की कोशिश कर रहे हैं. यह उन्हें युद्ध की यादों को भुलाने और आमदनी में मदद कर रहा है.युद्ध और मानवीय संकट के बावजूद गाजा के कई युवा दुनिया भर के ग्राहकों के लिए कोडिंग कर रहे हैं. इस्राएली ड्रोन और एंबुलेंस के सायरनों की आवाज के बीच तारिक जईम रोजाना को-वर्किंग स्पेस पहुंचते हैं. वहां इंटरनेट और उपकरणों को चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध है.
तारिक की पत्नी और तीन बच्चे युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ही मिस्र चले गए थे. ऑनलाइन काम उनके लिए कमाई का जरिया बन गया है. 44 वर्षीय प्रोग्रामर तारिक कहते हैं, "काम के वक्त मेरा ध्यान केवल कोडिंग पर रहता है. मैं अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों के बारे में सोचना बंद कर देता हूं. मैं हवाई हमलों या पीने के पानी की तलाश के बारे में भूल जाता हूं. जब मैं लैपटॉप पर हूं, तो बाकी दुनिया खुद-ब-खुद दूर हो जाती है."
गाजा की बाकी आबादी की तरह इन फ्रीलांसरों ने भी खाने, पानी और रहने की जगह के लिए संघर्ष किया है. अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को खोया है. इन मुश्किल हालात के चलते उन्होंने काम छोड़ दिया. मगर कुछ फ्रीलांसर काम करते रहे. वे कनाडा, कुवैत और तुर्की के व्यवसायों के लिए वेबसाइट और लोगो डिजाइन कर रहे थे. दो साल तक चले भीषण युद्ध के बाद अब इन फ्रीलांसरों का काम फिर से संभालने लगा है.
इस्राएली प्रतिबंधों के बीच बढ़ा डिजिटल सेक्टर
फ्रीलांसर डॉट कॉम, अपवर्क और मुस्तक्ल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गाजा के हजारों फ्रीलांसर रजिस्टर्ड हैं. लगभग एक दशक से भी पहले गाजा में डिजिटल फ्रीलांसिंग लोकप्रिय होने लगी थी. लेकिन 2007 में हमास के गाजा पर कब्जे के बाद इस्राएल की सख्त नाकेबंदी से खेती, फैक्ट्रियों और दूसरे पारंपरिक कारोबार को बड़ा नुकसान हुआ.
गाजा में बेरोजगारी बढ़ती रही, लेकिन इंटरनेट की बेहतर व्यवस्था बेहतर थी. युद्ध से पहले, 10 में से 9 घरों के पास इंटरनेट कनेक्शन था. ऐसे में हजारों पढ़े-लिखे युवा ऑनलाइन काम की ओर बढ़ते गए. डिजिटल स्किल वाले कॉलेज ग्रेजुएट विदेशों से काम लेने लगे. इसने विदेशी डोनर्स और गैर-सरकारी संगठनों का ध्यान भी आकर्षित किया.
युद्ध से पहले अमरीका-आधारित संस्था मर्सी कॉर्प्स का 'गाजा स्काई गीक्स' प्रोग्राम कई आधुनिक को-वर्किंग चला रहा था. लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने यह सब बदल दिया. इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों का अपहरण किया गया. गाजा प्रशासन के अनुसार इसके जवाब में इस्राएल के सैन्य अभियान में 72,700 से ज्यादा लोग मारे गए. लगभग पूरी आबादी विस्थापित हो गई. लाखों लोगों को टेंट कैंपों में शरण लेनी पड़ी. बिजली और इंटरनेट बंद हो गया.
गाजा स्काई गीक्स की वरिष्ठ प्रोग्राम मैनेजर रैंड साफी ने बताया कि उनके तीन में से दो सेंटर हवाई हमलों में तबाह हो गए. अब यह संस्था फिर से इस सेक्टर को खड़ा करने की कोशिश कर रही है. इसके तहत पांच स्वतंत्र को-वर्किंग जगहों को मदद दी जा रही है, जहां डिजिटल फ्रीलांसर दोबारा काम कर सकें.
डेडलाइन पर काम पूरा करना चुनौती
युद्ध में गाजा का 75 प्रतिशत से ज्यादा दूरसंचार नेटवर्क तबाह हो गया. बिजली कटौती की वजह से काम समय पर पूरा करना अक्सर मुश्किल हो जाता. युद्ध के दौरान सॉफ्टवेयर इंजीनियर शरीफ नईम ने 'ताकत गाजा' नाम से को-वर्किंग स्पेस शुरू किया, जो सोलर जेनरेटर से चलता है.
नईम बताते हैं, "शुरुआत में सबसे बड़ी समस्या बिजली और इंटरनेट की थी. लेकिन अब गाजा में कई वर्कस्पेस खुल गए हैं जिससे यह दिक्कत पहले से कम हो गई है. आज इस जगह का इस्तेमाल 500 से अधिक फ्रीलांसर कर रहे हैं. उन्हें पूरे दिन इंटरनेट और दूसरे फ्रीलांसरों से जुड़ने का मौका मिलता है."
इन प्रयासों में महिलाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. रीम अलखतीब, मां होने के साथ-साथ ग्राफिक डिजाइनर भी हैं. उनके पति के पास काम नहीं है और महंगाई बढ़ गई है. वह अनाज और पानी के लिए लंबी कतारों में लगने जैसी रोज की मुश्किलों के साथ भी ऑनलाइन काम के लिए समय निकालने की कोशिश करती हैं. फ्रीलांसिंग से होने वाली अतिरिक्त कमाई ही रीम के परिवार को चला रही है.
पेमेंट हासिल करना मुश्किल
गाजा में बैंकिंग सेवाएं अक्सर बंद रहती हैं. पेपाल जैसे प्लेटफॉर्म फलीस्तीनी पते वाले लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में फ्रीलांसरों को भुगतान पाने के लिए दूसरे रास्ते अपनाने पड़ते हैं. वे विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों के जरिए पैसे मंगवाते हैं. कुछ लोग भारी फीस लेने वाले कैश एजेंटों की मदद लेते हैं.
साल 2024 में अपने पति और बेटी को खोने के बाद सलसाबील बरदावी ने 'गाज टैलेंट्स' की शुरुआत की. यह गाजा के फ्रीलांसरों को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से जोड़ने में सहायता करता है. यह अब तक फ्रीलांसरों के लिए छह लाख डॉलर से अधिक की कमाई कराने में मदद कर चुका है. यह प्लेटफॉर्म बैंक ऑफ फलीस्तीन और डिजिटल वॉलेट 'पेपाल' के साथ साझेदारी भी कर चुका है. सलसाबील बरदावी कहती हैं कि यहां बहुत से लोग काम कर सकते हैं. उन्हें सिर्फ एक लैपटॉप, इंटरनेट, बिजली और काम देने वाले ग्राहकों की जरूरत है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 19, 2026 04:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

