Lyrid Meteor Shower 2026: भारत के आसमान में दिखेगा ‘लिरिड उल्का बौछार’ का अद्भुत नजारा; जानें दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में देखने का सही समय
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली: खगोल प्रेमियों के लिए आज की रात बेहद खास होने वाली है. दुनिया की सबसे पुरानी दर्ज खगोलीय घटनाओं में से एक, 'लिरिड उल्का बौछार' (Lyrid Meteor Shower) आज यानी 21 अप्रैल और कल 22 अप्रैल की रात को भारत के आसमान में अपने चरम पर होगी. यह अद्भुत नजारा तब दिखता है जब पृथ्वी 'कॉमेट थैचर' (Comet Thatcher) द्वारा छोड़े गए मलबे के बीच से गुजरती है. जब ये छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो वे घर्षण के कारण जल उठते हैं, जिससे रोशनी की लंबी लकीरें बनती हैं जिन्हें आम भाषा में 'टूटते तारे' कहा जाता है. उल्का वर्षा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता सहित प्रमुख शहरों से दिखाई देगी. यह भी पढ़ें: NASA Artemis II Mission: नासा के आर्टेमिस II मिशन की ऐतिहासिक वापसी; आज प्रशांत महासागर में होगी अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग

भारत में कब और कहाँ देखें?

भारत में लिरिड्स को देखने का सबसे अच्छा समय रात 12:00 बजे से सुबह 5:00 बजे के बीच है. खगोलविदों के अनुसार, सुबह होने से ठीक पहले यानी 3:00 बजे से 5:00 बजे के बीच दृश्यता (Visibility) सबसे अधिक रहने की उम्मीद है. ये उल्काएं उत्तर-पूर्वी आकाश में 'वीगा' (Vega) तारे के पास स्थित 'लाइरा' (Lyra) नक्षत्र से आती हुई प्रतीत होंगी.

प्रमुख शहरों में देखने का समय

स्थानीय मौसम और प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) के आधार पर अलग-अलग शहरों में दृश्यता अलग हो सकती है:

  • दिल्ली: रात 2:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (शहरी रोशनी के कारण मध्यम दृश्यता).
  • मुंबई: रात 2:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (तटीय उमस और लाइट प्रदूषण का असर हो सकता है).
  • बेंगलुरु: रात 2:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (साफ आसमान के कारण बेहतर स्थिति).
  • पुणे और हैदराबाद: रात 2:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (शहर के बाहरी इलाकों में सबसे अच्छा नजारा).
  • कोलकाता और चेन्नई: रात 2:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक (उमस और धुंध बाधा डाल सकते हैं).

क्या दिखेगा आसमान में?

लिरिड्स को मध्यम तीव्रता वाली उल्का बौछार माना जाता है। साफ आसमान होने पर प्रति घंटे लगभग 10 से 15 उल्काएं देखी जा सकती हैं. कभी-कभी इनमें 'फायरबॉल्स' (Fireballs) भी दिखाई देते हैं, जो बहुत चमकीले होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस घटना को पिछले 2,700 वर्षों से देखा जा रहा है.

बिना किसी उपकरण के कैसे देखें?

इस खगोलीय नजारे को देखने के लिए किसी दूरबीन या विशेष चश्मे की जरूरत नहीं है. विशेषज्ञों की कुछ महत्वपूर्ण सलाह:

  1. अंधेरी जगह चुनें: शहर की चकाचौंध से दूर किसी अंधेरे स्थान (जैसे छत या खुला मैदान) पर जाएं.
  2. आंखों को ढलने दें: अंधेरे में अपनी आंखों को पूरी तरह से अनुकूलित होने के लिए कम से कम 15-20 मिनट का समय दें.
  3. धैर्य रखें: मोबाइल स्क्रीन देखने से बचें क्योंकि इसकी रोशनी आपकी आंखों की संवेदनशीलता को कम कर सकती है.

लिरिड्स के बाद, अगला बड़ा खगोलीय कार्यक्रम मई में 'एटा एक्वेरिड्स' (Eta Aquariids) होगा. राहत की बात यह है कि इस वर्ष चंद्रमा की वर्तमान स्थिति दृश्यता में कोई बड़ी बाधा नहीं डालेगी.