Digital Payments: डिजिटल पेमेंट में बड़ी उछाल, अप्रैल 2026 में UPI ने दर्ज किए 22.35 अरब ट्रांजैक्शन, 29.03 लाख करोड़ रुपये का हुआ लेनदेन
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Digital Payments Ecosystem Boost: भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम ने नए वित्त वर्ष (2026-27) की शुरुआत शानदार बढ़त के साथ की है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए 22.35 अरब लेनदेन हुए हैं. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 25 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है.

मूल्य के संदर्भ में देखें तो अप्रैल महीने में कुल 29.03 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल लेनदेन हुआ, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है.  यह भी पढ़े:  GPay पॉकेट मनी क्या है? जानें कैसे काम करता है UPI Circle और कौन कर सकता है इस्तेमाल

दैनिक औसत लेनदेन में उल्लेखनीय सुधार

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल माह में दैनिक औसत लेनदेन की संख्या बढ़कर 74.5 करोड़ हो गई, जो मार्च में 73 करोड़ थी. वहीं, दैनिक औसत ट्रांजैक्शन वैल्यू भी पिछले महीने के 95,243 करोड़ रुपये से बढ़कर 96,766 करोड़ रुपये पर पहुँच गई है.

इसके अतिरिक्त, तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) का प्रदर्शन भी मजबूत रहा है. अप्रैल में IMPS के जरिए 36.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत 7.01 लाख करोड़ रुपये रही. इसमें सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता प्रभाव

मार्च 2026 में UPI ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक का सबसे उच्चतम मासिक स्तर (22.64 अरब ट्रांजैक्शन) छुआ था. वर्तमान में UPI यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर समेत आठ से अधिक देशों में सक्रिय है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता से प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) में आसानी हुई है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हुई है.

एक दशक में 12,000 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि

वित्त मंत्रालय के आकलन के अनुसार, पिछले एक दशक में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में लगभग 12,000 गुना की वृद्धि देखी गई है. 11 अप्रैल 2016 को लॉन्च होने के बाद से UPI भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन गया है.

वित्त वर्ष 2016-17 में जहां केवल 2 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन से अधिक हो गया है. मूल्य के मामले में भी यह सफर 0.07 लाख करोड़ रुपये से शुरू होकर वित्त वर्ष 2025-26 में 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी UPI को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है. वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में निरंतर विस्तार यह स्पष्ट करता है कि अब UPI केवल छोटे खुदरा भुगतानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च-मूल्य वाले लेनदेन के लिए भी उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन चुका है.