स्मार्टफोन बाजार का नया ट्रेंड: क्या पुराने मॉडल को नया बताकर बेच रही हैं कंपनियां? रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में कंपनियां मुनाफा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए पुराने फोन मॉडलों को मामूली बदलावों के साथ नए नाम से लॉन्च कर रही हैं. फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति से उपभोक्ताओं को बिना किसी खास तकनीकी अपग्रेड के ऊंचे दाम चुकाने पड़ रहे हैं.
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नई दिल्ली: भारतीय स्मार्टफोन बाजार (Indian Smartphone Market) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला ट्रेंड देखने को मिल रहा है. उद्योग जगत के विशेषज्ञों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां भारत में अपने पुराने और स्थापित हैंडसेट मॉडलों को ही नए नाम और पैकेजिंग के साथ दोबारा लॉन्च कर रही हैं. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान और अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कंपनियां इस रणनीति का सहारा ले रही हैं. फोर्ब्स इंडिया (Forbes India) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग सभी बड़े स्मार्टफोन ब्रांड्स द्वारा स्थापित प्लेटफॉर्म्स पर मामूली हार्डवेयर बदलाव करके पुराने डिवाइसों को रीसायकल किया जा रहा है और उन्हें काफी अधिक कीमतों पर बाजार में उतारा जा रहा है. यह भी पढ़ें: BSNL सैटेलाइट फोन: बिना नेटवर्क के भी होगी बात; जानिए कीमत, फीचर्स, किसे मिल सकता है और खरीदने का पूरा प्रोसेस
अनुसंधान और विकास (R&D) खर्च में कटौती की रणनीति
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों की इस रणनीति के पीछे मुख्य कारण अनुसंधान और विकास (R&D) पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को कम करना है. जब कोई कंपनी पूरी तरह से नया डिजाइन तैयार करती है, तो उसे लंबी टेस्टिंग, कठिन सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं और नई सप्लाई चेन से गुजरना पड़ता है, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है.
इसके विपरीत, पहले से सफल और स्थापित हार्डवेयर प्लेटफॉर्म का दोबारा उपयोग करके कंपनियां इस लंबी प्रक्रिया से बच जाती हैं. इससे वैश्विक चिप किल्लत और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण बढ़ती लागत के बावजूद ब्रांड्स को बहुत कम समय में नए उत्पाद बाजार में उतारने और अपना मुनाफा सुरक्षित रखने में मदद मिलती है.
रिटेलर्स और उपभोक्ताओं के लिए बढ़ती मुश्किलें
इस चलन के कारण बाजार में वास्तविक रूप से नए और अनूठे उत्पादों की भारी कमी देखी जा रही है. उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर गिने-चुने आरएंडडी सेंटर होने के कारण कई अलग-अलग ब्रांड लगभग एक जैसे हार्डवेयर का उपयोग कर रहे हैं और केवल कॉस्मेटिक (बाहरी) बदलाव करके बाजार में कृत्रिम श्रेणियां (आर्टिफिशियल टियर्स) बना रहे हैं.
खुदरा विक्रेताओं (Retailers) ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि एक ही तकनीकी क्षमता वाले डिवाइस को अलग-अलग चैनलों के माध्यम से, मामूली बदलावों और भारी मूल्य विसंगतियों के साथ बेचा जा रहा है. इससे न केवल उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं, बल्कि उन्हें बिना किसी वास्तविक तकनीकी सुधार के सिर्फ नए नाम के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है.
प्लेटो पर पहुंच चुका है स्मार्टफोन इनोवेशन; पारदर्शिता की मांग
हालिया मार्केट डेटा भी इस बदलाव की पुष्टि करता है। हाल के दिनों में लॉन्च हुए कई स्मार्टफोन के फीचर्स में अपनी पिछली पीढ़ी (सक्सेसर जनरेशन) की तुलना में न के बराबर अंतर देखा गया है. कुछ महीनों के अंतराल पर लॉन्च होने वाले फोन में स्क्रीन साइज, बैटरी क्षमता और कैमरा सेंसर बिल्कुल एक जैसे होते हैं, और केवल प्रोसेसर (चिपसेट) में मामूली बदलाव कर बड़ी कीमत वसूल ली जाती है.
अब उपभोक्ता संगठनों और रिटेलर्स ने इस दिशा में कंपनियों से अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है. उनका तर्क है कि स्मार्टफोन में वास्तविक तकनीकी नवाचार (इन्नोवेशन) अब एक ठहराव (प्लेटो) पर पहुंच चुका है, और बिक्री बढ़ाने के लिए केवल ब्रांड पोजिशनिंग और मार्केटिंग का सहारा लिया जा रहा है. ऐसे में आम ग्राहकों के लिए 'नए' और 'रीपैकेज्ड' स्मार्टफोन के बीच अंतर करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 12:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

