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Prabal Pratap Singh: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाला लखनऊ यूनिवर्सिटी का लॉ स्टूडेंट गिरफ्तार, CJI को अपशब्द कहने और कोर्ट में पेपर फेंकने का आरोप

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर हंगामा करने, मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अपशब्द कहने और कोर्ट रूम में दस्तावेज हवा में उछालने के आरोप में लखनऊ यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट प्रबल प्रताप सिंह और उसके साथी को गिरफ्तार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया है.

Prabal Pratap Singh: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाला लखनऊ यूनिवर्सिटी का लॉ स्टूडेंट गिरफ्तार, CJI को अपशब्द कहने और कोर्ट में पेपर फेंकने का आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के भीतर कार्यवाही में बाधा डालने, देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने और कोर्ट रूम में केस के दस्तावेज फेंकने के आरोप में 24 वर्षीय लॉ स्टूडेंट प्रबल प्रताप सिंह (Prabal Pratap Singh) को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इस मामले में उसके एक अन्य साथी छात्र चंद्र भान को भी हिरासत में लिया है. यह घटना पिछले सप्ताह कोर्ट रूम नंबर 13 में एक सुनवाई के दौरान घटित हुई थी, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को बाहर निकाला था. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा स्टाफ की शिकायत पर नई दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई है. यह भी पढ़ें: Red Fort: दिल्ली के लाल किले में 15 अगस्त तक नहीं मिलेगी एंट्री, जानें क्यों लिया गया यह फैसला

कौन हैं आरोपी छात्र और क्या है उनका बैकग्राउंड?

दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है और लखनऊ यूनिवर्सिटी में एलएलबी (LLB) तृतीय वर्ष का छात्र है. वहीं, दूसरा आरोपी चंद्र भान (23 वर्ष) उत्तर प्रदेश के रायबरेली का रहने वाला है और उसी विश्वविद्यालय में कानून का द्वितीय वर्ष का छात्र है. पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह घटना किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी या इन छात्रों का व्यक्तिगत आक्रोश था.

कोर्ट रूम के भीतर क्या हुआ था?

यह घटना 10 जुलाई 2026 को उस समय हुई जब जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में प्रबल प्रताप सिंह खुद 'पेटिशनर-इन-पर्सन' (बिना वकील के खुद पैरवी करने वाले) के रूप में अदालत के सामने पेश हुआ था.

सुनवाई के दौरान प्रबल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए न्यायपालिका के सदस्यों के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया. पुलिस के अनुसार, छात्र ने न्यायाधीशों से कहा:

"मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक सेवक), मैं आपको आदेश देता हूं कि आप एसीपी... लखनऊ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें."

इस पर जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने तुरंत कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा, "आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?" इसके जवाब में छात्र ने कहा, "मेरी तरफ से बस इतना ही है, सब कुछ रिकॉर्ड पर है." इसके तुरंत बाद आरोपी ने अपने केस के कागजात हवा में उछाल दिए और मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करने लगा, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उसे बाहर कर दिया.

सुरक्षा जांच और मानसिक स्थिति का परीक्षण

तिलक मार्ग पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत सरकारी काम में बाधा डालने और आपराधिक बल का प्रयोग करने का मामला दर्ज किया है.

जांच के दौरान, सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली पुलिस दोनों छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 'इन्स्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज' (IHBAS) लेकर गई. अस्पताल के डॉक्टरों ने दोनों का गहन परीक्षण करने के बाद उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ (साउंड माइंड) घोषित किया और स्पष्ट किया कि उन्हें किसी तत्काल मनोरोग चिकित्सा (Psychiatric Intervention) की आवश्यकता नहीं है. तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके पास से कुछ आपत्तिजनक पर्चे (पम्फलेट्स) भी बरामद किए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही से किया इनकार

इस गंभीर दुर्व्यवहार के बावजूद, उच्चतम न्यायालय ने उदारता दिखाते हुए दोनों छात्रों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की औपचारिक कार्यवाही शुरू नहीं करने का फैसला किया है.

इस घटना पर टिप्पणी करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद संवेदनशील रुख अपनाया. उन्होंने कहा:

"नौजवान और युवा कभी-कभी भावनाओं में बहकर ऐसी चीजें कर बैठते हैं। हमें इस प्रकरण को तूल देने के बजाय नजरअंदाज करना चाहिए. हालांकि, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखना समाज के हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है."

सुप्रीम कोर्ट के इस नरम रुख के बाद भी, दिल्ली पुलिस कानून व्यवस्था और अदालत परिसर की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल के तहत दर्ज आपराधिक मामले की अपनी कानूनी जांच को आगे बढ़ा रही है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 08:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).