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HC on Groping Breast: गुवाहाटी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पीरियड की समस्या की आड़ में मरीज के स्तन छूना 'रूटीन चेकअप' नहीं; डॉक्टर की दोषसिद्धि बरकरार

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मासिक धर्म की समस्या लेकर आई महिला मरीज के साथ अश्लील हरकत करने के आरोपी डॉक्टर की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीरियड्स की जांच के दौरान स्तन छूना या दबाना किसी भी तरह से 'रूटीन मेडिकल एग्जामिनेशन' का हिस्सा नहीं माना जा सकता.

HC on Groping Breast: गुवाहाटी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पीरियड की समस्या की आड़ में मरीज के स्तन छूना 'रूटीन चेकअप' नहीं; डॉक्टर की दोषसिद्धि बरकरार
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

गुवाहाटी: गुवाहाटी उच्च न्यायालय (Gauhati High Court) ने चिकित्सा जगत के नैतिक मूल्यों और महिला सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है. अदालत ने अनियमित मासिक धर्म (Irregular Periods) की शिकायत लेकर आई एक महिला मरीज के साथ शारीरिक परीक्षण के दौरान अश्लील हरकत करने और शील भंग करने के आरोपी डॉक्टर की दोषसिद्धि (Conviction) को बरकरार रखा है. हाई कोर्ट ने डॉक्टर के इस तर्क को पूरी तरह खारिज और "हास्यास्पद" करार दिया कि यह एक सामान्य स्त्री रोग संबंधी (Gynaecological) रूटीन जांच का हिस्सा था.

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिला की गरिमा और शील को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में पीड़िता का बयान ही आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त है. कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाही में मामूली विसंगतियां अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करती हैं. यह भी पढ़ें: HC on Women Intimate Images: मद्रास हाई कोर्ट की गंभीर नसीहत, रिश्तों में विश्वास कितना भी गहरा हो; भूलकर भी शेयर न करें अपनी इंटीमेट तस्वीरें और वीडियो

क्या था पूरा मामला?

यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता अनियमित पीरियड्स की समस्या की शिकायत लेकर आरोपी डॉक्टर के क्लिनिक पहुंची थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, डॉक्टर ने जांच के बहाने महिला के ब्लाउज के बटन खोले, उसके स्तनों को अनुचित तरीके से छुआ और जब महिला असहज हुई, तो उसे यह कहकर आश्वस्त करने की कोशिश की कि यह चिकित्सा प्रक्रिया का ही हिस्सा है.

इस घटना के बाद पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई. निचली अदालत ने साल 2013 में आरोपी डॉक्टर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दोषी पाते हुए दो साल के साधारण कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. साल 2014 में सत्र न्यायालय (सेशंस कोर्ट) ने भी इस फैसले को सही ठहराया, जिसके खिलाफ डॉक्टर ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

गुवाहाटी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

'पीड़िता ही तय कर सकती है कि उसका शील भंग हुआ या नहीं'

उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान रेखांकित किया कि किसी महिला की गरिमा या शील को ठेस पहुंचाना एक अमूर्त अवधारणा (Abstract Term) है, और केवल पीड़िता ही यह सही ढंग से बयां या न्यायसंगत ठहरा सकती है कि उसकी गरिमा को ठेस पहुंची है या नहीं.

अदालत ने कहा:

"ऐसे मामलों में आमतौर पर चश्मदीद गवाह सामने नहीं आते हैं. इसलिए, यदि पीड़िता का बयान विश्वसनीय और सुसंगत है, तो वह आरोपी को दोषी साबित करने के लिए अपने आप में पर्याप्त आधार है. इस बात को साबित करने के लिए किसी अन्य डॉक्टर की विशेषज्ञ राय (Doctor's Opinion) अनिवार्य शर्त नहीं है."

प्रेगनेंसी टेस्ट के नाम पर भी ऐसी हरकत 'हास्यास्पद'

आरोपी डॉक्टर ने अपने बचाव में दिए बयान में स्वीकार किया था कि उसने गर्भावस्था परीक्षण (Pregnancy Test) के लिए महिला के पेट को छुआ था और उसके स्तनों को दबाया था.

इस दलील पर तीखी टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि यदि इसे प्रेगनेंसी टेस्ट की प्रक्रिया भी मान लिया जाए, तब भी इस तरह अनुचित रूप से स्तनों को दबाना पूरी तरह से बेतुका और हास्यास्पद प्रतीत होता है. अदालत ने जोर देकर कहा कि भले ही पीड़िता को कोई शारीरिक चोट नहीं आई थी, लेकिन डॉक्टर की इस अवांछित हरकत ने महिला के मानसिक स्वास्थ्य और उसकी अंतरात्मा (Psyche) पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव डाला है.

सजा में किया गया आंशिक बदलाव

हाई कोर्ट ने डॉक्टर की दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा, लेकिन सजा की अवधि में तकनीकी आधार पर आंशिक बदलाव किया. चूंकि यह घटना वर्ष 2013 के ऐतिहासिक आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम के लागू होने से पहले की थी, इसलिए अदालत ने समय बीतने और कानून के पुराने प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की जेल की सजा को हटाकर उसे केवल जुर्माने की सजा में तब्दील कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि को बरकरार रखना चिकित्सा पेशे में इस तरह के कदाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 08:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).