लॉस एंजिल्स/कोलकाता: इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद बड़ी कंपनियों में काम करने का सपना हर छात्र देखता है, लेकिन अगर अचानक नौकरी चली जाए तो क्या? आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के पूर्व छात्र प्रभाकर प्रसाद (Prabhakar Prasad) ने हार मानने के बजाय अपना रास्ता खुद चुना और आज वे लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में 'बिहारी चायवाला' (Bihari Chaiwala) के नाम से मशहूर हो गए हैं. प्रभाकर की यह कहानी उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है जो लेऑफ (छंटनी) के दौर से गुजर रहे हैं. यह भी पढ़ें: ‘Will Pee in Your Mouth’: मथुरा जंक्शन पर चाय में देरी होने पर सिपाही ने वेंडर को जड़ा थप्पड़, दी बेहद भद्दी गालियां; वीडियो वायरल होने के बाद सस्पेंड
टेक लेऑफ और जीवन में बदलाव
प्रभाकर मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। अपनी मेहनत के दम पर वे अमेरिका पहुंचे और वहां टेक सेक्टर में करियर बनाया। लेकिन फरवरी 2025 में आई वैश्विक मंदी और टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी की चपेट में प्रभाकर भी आ गए और उनकी नौकरी चली गई।
कॉर्पोरेट करियर छोड़ शुरू किया फूड स्टार्टअप
नौकरी खोने के बाद प्रभाकर ने मायूस होने के बजाय भारत के स्वाद को अमेरिका तक ले जाने का फैसला किया। उन्होंने लॉस एंजिल्स के फार्मर्स मार्केट्स में भारतीय स्टाइल की 'मसाला चाय' और 'पोहा' का स्टॉल लगाना शुरू किया। आज वे अपने स्टॉल पर ग्राहकों को ताजा मसाला चाय बनाकर परोसते हैं। वहां के स्थानीय लोग और भारतीय मूल के लोग उनके स्टॉल पर भारतीय स्ट्रीट फूड का आनंद लेने पहुंचते हैं.
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कमाई और चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभाकर अपने स्टॉल पर एक कप मसाला चाय लगभग 8 डॉलर (करीब 650-700 रुपये) में बेचते हैं. हालांकि भारतीय मानकों के हिसाब से यह कीमत अधिक लग सकती है, लेकिन कैलिफोर्निया के फार्मर्स मार्केट्स के हिसाब से यह वहां के अन्य फूड प्रोडक्ट्स की श्रेणी में ही है. प्रभाकर अपने इस सफर के वीडियो इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करते रहते हैं, जिसमें वे चाय बनाते हुए और ग्राहकों से बात करते हुए अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हैं.
प्रेरणादायक सफर
प्रभाकर प्रसाद का यह सफर इस बात का उदाहरण है कि असफलता जीवन का अंत नहीं है. जहां एक ओर वैश्विक मंदी ने लाखों लोगों को तनाव में डाल दिया, वहीं प्रभाकर ने अपनी मेहनत और लचीलेपन (resilience) के दम पर एक नया काम शुरू किया. सोशल मीडिया पर यूजर्स उनके इस साहसिक निर्णय की खूब प्रशंसा कर रहे हैं और उन्हें 'एलए (LA) का बिहारी चायवाला' कहकर संबोधित कर रहे हैं.












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