FACT CHECK: चीन भारतीय सीमा में 50 से 60 KM अंदर तक घुस आया है? BJP सांसद का 6 साल पुराना वीडियो वायरल, जानें सच्चाई
Photo- @KishorPurohitt & _SyncreticWorld/X

Tapir Gao China statement: भाजपा सांसद तापिर गाओ द्वारा संसद में दिए गए एक बयान का 6 साल पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि चीन भारतीय सीमा में 50 से 60 किलोमीटर अंदर तक घुस आया है और अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है. सोशल मीडिया यूजर इसे लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. एक वेरिफाइड 'एक्स' यूजर @mohitlaws ने लिखा, “चीन ने भारतीय क्षेत्र में 50-60 किलोमीटर अंदर तक कब्जा कर लिया है, अरुणाचल अगला डोकलाम होगा.”

वहीं, दूसरे' एक्स' यूजर @KishorPurohitt ने भी इसी दावे के साथ वीडियो को शेयर किया है. कई लोग इस वीडियो को हालिया घटनाक्रम से जोड़कर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं.

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बीजेपी सांसद का पुराना वीडियो

ये है असली सच्चाई

वायरल वीडियो की असलियत क्या है?

लेकिन जब इस वायरल वीडियो की पड़ताल की गई, तो कहानी कुछ और ही निकली. वायरल वीडियो को जब कीफ्रेम्स में तोड़कर रिवर्स इमेज सर्च किया गया, तो पता चला कि यह वीडियो 19 नवंबर 2019 का है. यह वीडियो भाजपा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी मौजूद है. टाइटल दिया गया है: “श्री तापिर गाओ ने लोकसभा में तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामले उठाए: 19.11.2019”.

इतना ही नहीं, इंडिया टुडे के एक रिपोर्टर ने इसी मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गाओ से भी बात की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर अपने 2019 के भाषण का हवाला देते हुए अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण का जिक्र किया था.

2019 में मीडिया में भी प्रकाशित हुई थी खबर

इसके अलावा The Indian Express और Times of India की रिपोर्ट्स भी इसी तारीख को पब्लिश हुई थीं, जिनमें सांसद तापिर गाओ के बयान का जिक्र है. उन्होंने लोकसभा में कहा था कि अरुणाचल प्रदेश का एक इलाका, जहां पहले सेना के कैप्टन के तौर पर जसवंत सिंह तैनात थे, अब भारत के नियंत्रण में नहीं है. उन्होंने चीन द्वारा उस इलाके में कब्जे की बात कही थी.

उन्होंने यह भी कहा था कि आने वाले समय में अगर कोई डोकलाम जैसा गतिरोध होता है, तो वह अरुणाचल में ही हो सकता है. लेकिन यह बयान 6 साल पुराना है, न कि हालिया.

अंत में क्या निकला निष्कर्ष

फैक्ट चेक में भी यह बात सामने आई कि यह वीडियो भ्रामक तरीके से शेयर किया जा रहा है. यानी, पुराना वीडियो दिखाकर सोशल मीडिया पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है.

वायरल हो रहा वीडियो सच्चा जरूर है, लेकिन यह 2019 का है, न कि 2025 का. इसलिए इसे वर्तमान हालात से जोड़ना गलत और भ्रामक है.