दुनिया के विभिन्न देशों में प्रत्येक वर्ष 22 सितंबर को वर्ल्ड रोज-डे मनाया जाता है. वस्तुतः यह कैंसर ग्रस्त रोगियों को समर्पित दिन है, जो वर्तमान में इस घातक बीमारी से लड़ रहे हैं. कैंसर की घातकता सर्वविदित है. कैंसर पीड़ित को जब इस बीमारी का पता चलता है तो वह भावनात्मक रूप से हताश और निराश जाते हैं. यही वह समय है, जब हमें उन्हें अहसास दिलाने की जरूरत होती है कि इस लड़ाई में वह अकेले नहीं हैं. यही वह समय है, जब उन्हें साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण की जरूरत होती है. आइये जानते हैं कि इस दिन को विश्व रोज दिवस के नाम से क्यों मनाया जाता है, साथ ही इसके महत्व एवं इतिहास के बारे में भी जानेंगे
क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड रोज डे?
इस वर्ल्ड रोज डे की सूत्रधार 12 वर्षीया कनाडा की रहने वाली लड़की मेलिंडा रोज है. साल 1994 में मेडिकल जांच से पता चला कि उन्हें एस्किन ट्यूमर है, जो सामान्य भाषा में रक्त कैंसर के विशेष रूप में जाना जाता है. एस्किन ट्यूमर के स्टेज को देखते हुए, डॉक्टर ने दावा किया था कि मेलिंडा बस कुछ सप्ताह तक जीवित रह सकेगी, लेकिन मेलिंडा मेलिंडा ने अपनी छोटी-सी जिंदगी में कभी भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. इस दौरान मेलिंडा अन्य कैंसर रोगियों से मिली, उन्हें खुशहाल जीवन के लिए कभी पोयम सुनाती, कभी कहानियां, कभी ईमेल पर खुश रहने के टिप्स शेयर करती. उसने अपने ही जीवन को नहीं, बल्कि दूसरे कैंसर पीड़ितों के मन में भी फाइट करने का जज्बा जगाया. 22 सितंबर को अंतिम सांस लेने तक वह लोगों को सीख दे गई हमें जीवन के प्रति निराशा नहीं रखनी चाहिए.
वर्ल्ड रोज डे का महत्व
विश्व रोज दिवस पर मेलिंडा के साहस और सकारात्मक दृष्टिकोणों को याद करने के अलावा यह कैंसर के बारे में अत्यधिक जागरूकता फैलाने और समय रहते इससे निदान पाने के लिए प्रेरित करने का दिन होता है. जन सामान्य लोगों को इस संदर्भ में चैतन्य किया जाता है कि उनकी जागरूकता से कैंसर के प्रथम स्टेज को पहचाना जा सकता है, और समय रहते इसका इलाज कर इसकी विभीषिका से बचा जा सकता है. यह लड़ाई कठिन है, लेकिन आम समाज से जुड़े लोगों को कैंसर पीड़ितों के जीवन में सकारात्मक रवैये को अपनाते हुए हर समय प्रोत्साहित करना चाहिए.
वर्ल्ड रोज डे सेलिब्रेशन
वर्ल्ड रोज डे के अवसर पर कैंसर पीड़ितों में जीवन के सकारात्मक पहलुओं के महत्व को जागृत किया जाता है. उन्हें गुलाब का फूल, कोई प्रेरक गिफ्ट, उनके साहसिक जीवन पर कविताएं, कहानियां सुनाई जा सकती हैं. उन्हें नृत्य फ्लोर पर लाकर उनके साथ खुशियां शेयर की जा सकती हैं. उन्हें अहसास कराये कि वह अकेले नहीं हैं. इसके अलावा सोसायटी अथवा पार्क जैसी आम जगहों पर कैंसर विशेषज्ञों को आमंत्रित कर एक कैंप लगाया जा सकता हैं, जहां चिकित्सक बताये कि किन लक्षणों के दिखने पर जांच जरूरी है, ताकि कैंसर के लक्षणों की पुष्टि होते ही तत्काल मरीज का इलाज कर उसके जीवन को बचाया जा सके. बता दें कि कैंसर का इलाज संभव है.












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