बरेली/नई दिल्ली: इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, माहे रमजान (Ramzan) का महीना इबादत और बरकत का महीना माना जाता है. माह-ए-रमजान में दुनिया भर के मुसलमान रोजा (Roza) रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं. कहा जाता है कि इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं और उनकी हर जायज दुआ कुबूल होती है. हालांकि इस बार का रमजान कुछ मायनों में बेहद खास है. गणनाओं के अनुसार, इस साल रमजान के महीने में पांच शुक्रवार (जुमा) पड़ रहे हैं, जिससे 26 साल बाद एक बार फिर 'दो अलविदा जुमा' (Alvida Juma) का दुर्लभ संयोग बनता दिख रहा है. यह भी पढ़ें: Ramzan Eid 2026 Mehndi Design: रमजान ईद की तैयारियों में छाई मेहंदी की रौनक, देखें लेटेस्ट और आकर्षक डिजाइन्स
कैसे बन रहा है पांच जुमा का संयोग?
सामान्यतः एक महीने में चार जुमा होते हैं, लेकिन इस बार रमजान के 30 दिनों के महीने में पांच जुमा पड़ने की प्रबल संभावना है। अब तक की स्थिति के अनुसार:
- पहला जुमा: 20 फरवरी को हो चुका है.
- दूसरा जुमा: 27 फरवरी को हो चुका है.
- तीसरा जुमा: 6 मार्च को संपन्न हुआ है.
- चौथा जुमा: 13 मार्च को होगा.
- पांचवां जुमा: 20 मार्च को होगा.
ईद की तारीख का दारोमदार चांद पर
आला हजरत दरगाह के मौलाना जाहिद रजा के अनुसार, दो अलविदा की स्थिति 12-13 साल के अंतराल पर बनती है. इस बार की स्थिति ईद-उल-फितर की तारीख पर निर्भर करेगी। यदि रमजान का महीना 30 दिनों का होता है और आखिरी दिन शुक्रवार (20 मार्च) पड़ता है, तो उस दिन पांचवां जुमा होगा, जिसे 'अलविदा जुमा' माना जाएगा.
हालांकि, यदि 29 का चांद नजर आता है और 20 मार्च को ईद मनाई जाती है, तो उस स्थिति में समीकरण बदल सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ईद-उल-फितर 20 या 21 मार्च में से किसी एक दिन मनाई जाएगी, जिसका अंतिम निर्णय चांद दिखने पर ही होगा. यह भी पढ़ें: Eid Al Fitr 2026 in UAE: यूएई में कब होगी छुट्टियों की शुरुआत? जानें संभावित तारीखें और लॉन्ग वीकेंड को दोगुना करने का तरीका
पहले भी बने हैं ऐसे हालात
यह स्थिति अपने आप में अनोखी है, लेकिन पूरी तरह नई नहीं है. इससे पहले वर्ष 1999 और 2000 में भी ऐसी स्थिति बनी थी. वहीं, साल 2013 में भी कुछ ऐसे ही हालात थे, हालांकि उस समय 29 का चांद दिखने के कारण ईद अगले दिन मना ली गई थी.
रमजान के महीने में पांच जुमा पड़ना धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि जुमे की नमाज का विशेष महत्व होता है. अब मुस्लिम समुदाय की निगाहें 20 मार्च के चांद पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पांचवें जुमे की नमाज के साथ रमजान का समापन होगा या ईद की खुशियां मनाई जाएंगी.













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