Diwali Padwa 2025 Wishes: दिवाली पड़वा (Diwali Padwa), बलि पूजा (Bali Puja) गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) के साथ ही मनाई जाती है. इस साल दिवाली पड़वा 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा. महाराष्ट्र में दिवाली पड़वा धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है. इस दिन लोग सोना खरीदते हैं, सुहागन महिलाएं अपने पति की आरती उतारती हैं और रात के समय आतिशबाजी की जाती है. वहीं उत्तर भारत में इस दिन लोग गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और दान करते हैं. व्यापारियों के लिए इसे साल की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है. इस दिन व्यापारी अपने बही खातों की पूजा करते है. वहीं उत्तर भारत में बलि पूजा, असुर राजा बलि का आशीर्वाद पाने के लिए मनाई और की जाती है. चूंकि यह वरदान भगवान विष्णु ने दिया था, इसलिए भारत में राक्षस राजा बलि की पूजा की जाती है. यह भी पढ़ें: Dev Uthani Ekadashi 2025: कब है देवउठनी एकादशी? जानें इस माह नवंबर में कितने दिन बजेगी शहनाइयां?
भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी किंवदंतियों के अनुसार, जब राजा बलि ने वामन अवतार को तीन पग जमीन देने का वचन दिया था, तब भगवान विष्णु के वामन अवतार ने दो पग में पूरी धरती और आकाश को नाप लिया था, जब तीसरा पैर रखने की बात आई तो वामन ने पूछा के तीसरा पैर कहा रखूं? तब राजा बलि ने उन्हें अपने सिर पर पैर रखने को कहा. जिसके बाद राजा बलि पर पैर रखते ही वो पाताल लोक में चले गए. महाराष्ट्र में दिवाली पड़वा पर्व को लोग अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार बहुत धूमधाम से मनाते हैं. इसके साथ ही शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी किया जाता है. ऐसे में इस बेहद खास अवसर पर आप भी इन शानदार विशेज, ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ इमेजेस, एचडी वॉलपेपर्स और फोटो एसएमएस के जरिए शुभ दिवाली पड़वा कह सकते हैं.
1-दिवाली पड़वा की शुभकामनाएं

2- दिवाली पड़वा की हार्दिक बधाई

3- हैप्पी दिवाली पड़वा

4- दिवाली पड़वा 2025

5- शुभ दिवाली पड़वा

चूँकि राजा बलि असुर होने के बाद भी उनमें आसुरी प्रवृत्ति नहीं थी, इसलिए भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे हर साल तीन दिनों के लिए भूलोक (पृथ्वी) पर आ सकते हैं. बलि प्रतिपदा के दिन राजा बलि भूलोक में भ्रमण करते हैं और पृथ्वी भ्रमण के दौरान अपने सभी भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. दक्षिण भारत में, ओणम के दौरान राजा बलि की पूजा की जाती है और ओणम की अवधारणा भी उत्तर भारत में मनाई जाने वाली बलि पूजा पर आधारित है.













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