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डॉन अबू सलेम ने बड़े भाई अबू हाकिम के निधन के बाद मांगी इमरजेंसी पैरोल, बॉम्बे हाईकोर्ट का किया रुख

अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद इमरजेंसी पैरोल की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. अबू सलेम ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाकर पारिवारिक रस्मों में शामिल होने की अनुमति मांगी है.

डॉन अबू सलेम ने बड़े भाई अबू हाकिम के निधन के बाद मांगी इमरजेंसी पैरोल, बॉम्बे हाईकोर्ट का किया रुख
(Photo Credits ANI)

अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम (Abu Salem) ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद इमरजेंसी पैरोल की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. अबू सलेम ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाकर पारिवारिक रस्मों में शामिल होने की अनुमति मांगी है. याचिका के अनुसार, अबू सलेम के बड़े भाई अबू हाकिम अंसारी का 14 नवंबर 2025 को निधन हो गया था. सलेम ने उन्हें पिता समान बताते हुए कहा है कि वह 40वें दिन की रस्में, कुरान ख्वानी, कब्रिस्तान में दुआ और परिवार से मिलने के लिए अस्थायी रूप से जेल से बाहर जाना चाहता है.

इस संबंध में अबू सालेम की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें उसे कुछ समय के लिए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने की अनुमति देने की अपील की गई है. यह भी पढ़े:  मुंबई में रिटायर्ड अफसर से 71 लाख रुपये की ठगी, अबू सलेम के नाम पर धमकी देकर खाते से ट्रांसफर करवाए पैसे

याचिका में अबू सालेम ने कहा है कि उसके बड़े भाई अबू हकीम अंसारी का निधन हो गया है, जिसके बाद वह परिवार के सदस्यों से मिलना चाहता है। साथ ही, उसने धार्मिक रस्मों में शामिल होने और अपने भाई की कब्र पर जाने की भी अनुमति मांगी है। अबू सलेम का कहना है कि यह उसके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय है और परिवार के बीच मौजूद रहना उसके लिए जरूरी है.

अबू सलेम ने अदालत को बताया कि जब उसका भाई गंभीर रूप से बीमार था, तब भी उसने पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन उस पर समय रहते सुनवाई नहीं हो सकी। अब भाई के निधन के बाद उसने इमरजेंसी पैरोल के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कानूनी प्रक्रिया और अदालतों की छुट्टियों के चलते पहले आवेदन पर फैसला नहीं हो पाया.

फिलहाल, अबू सलेम नासिक सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है। उसकी ओर से दायर याचिका में मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की गई है. अब बॉम्बे हाई कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई कर तय करेगा कि अबू सलेम को इमरजेंसी पैरोल दी जाए या नहीं.

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि मुस्लिम परंपरा के अनुसार 40 दिनों की अवधि पहले ही पूरी हो चुकी है। इस पर सलेम की ओर से पेश अधिवक्ता फरहाना शाह ने दलील दी कि याचिका समय पर दायर की गई थी, लेकिन शीतकालीन अवकाश के कारण उस पर सुनवाई नहीं हो सकी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 06, 2026 07:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).