Bohag Bihu 2026 Messages: असमिया नववर्ष ‘बोहाग बिहू’ के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes, Facebook Greetings के जरिए दें अपनों को शुभकामनाएं
आज के समय में बोहाग बिहू की परंपराएं केवल गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल रही हैं. इस शुभ अवसर पर लोग वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, और हिंदी कोट्स के जरिए एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजते हैं. 'बिहू खुभेच्छा' (बिहू की शुभकामनाएं) के संदेशों के साथ लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का प्रयास करते हैं.
Bohag Bihu 2026 Messages In Hindi: असम (Assam) के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और कृषि उत्सव बोहाग बिहू (Bohag Bihu) की शुरुआत इस वर्ष 14 अप्रैल 2026 से हो रही है. रोंगाली बिहू (Rongali Bihu) के नाम से प्रसिद्ध यह त्योहार असमिया नव वर्ष (Assam New Year) के आगमन का प्रतीक है. यह समय रबी की फसलों की कटाई और वसंत ऋतु के स्वागत का होता है, जो असमिया समुदाय की पहचान और सामूहिक एकता को दर्शाता है. सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को 'हत बिहू' भी कहा जाता है, जिसमें प्रत्येक दिन का अपना धार्मिक और सामाजिक महत्व है.
बोहाग बिहू का उत्सव चरणों में विभाजित है, जो प्रकृति और ईश्वर के प्रति सम्मान प्रकट करता है:
- गोरू बिहू (पहला दिन): यह दिन पूरी तरह से पशुधन को समर्पित है. सुबह पशुओं को नदी या तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है. उनके पुराने रस्सों को बदलकर नए रस्से बांधे जाते हैं और उनकी अच्छी सेहत की प्रार्थना की जाती है.
- मनुह बिहू (दूसरा दिन): यह मुख्य नव वर्ष का दिन होता है. लोग स्नान के बाद नए पारंपरिक वस्त्र धारण करते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं. इस दिन 'गमोसा' (पारंपरिक तौलिया) उपहार में देने की विशेष परंपरा है.
- गोसाई बिहू (तीसरा दिन): तीसरे दिन घरों और नामघरों (प्रार्थना घरों) में कुल देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. लोग आने वाले वर्ष में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
बिहू का उत्सव ढोल (Dhol), पेपा (भैंस के सींग से बना वाद्ययंत्र), बांसुरी और ताल की गूंज के बिना अधूरा है.पारंपरिक परिधानों में सजे युवा और महिलाएं टोलियों में बिहू नृत्य करते हैं, जो खेतों से लेकर शहर के मंचों तक दिखाई देता है.
आज के समय में बोहाग बिहू की परंपराएं केवल गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल रही हैं. इस शुभ अवसर पर लोग वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, और हिंदी कोट्स के जरिए एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजते हैं. 'बिहू खुभेच्छा' (बिहू की शुभकामनाएं) के संदेशों के साथ लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का प्रयास करते हैं.





इस अवसर पर घरों में विशेष पकवान तैयार किए जाते हैं. मुख्य रूप से चावल, तिल, दूध और नारियल का उपयोग कर 'पीठा', 'लारू' (लड्डू) और 'जलपान' बनाया जाता है, जिसे मेहमानों और पड़ोसियों के साथ साझा किया जाता है.
बोहाग बिहू केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि किसानों का ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है. फसल की कटाई के बाद किसान अपनी पहली उपज देवताओं को अर्पित करते हैं. यह उत्सव सामाजिक भेदभाव को मिटाकर लोगों को एकजुट करने और असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 14, 2026 07:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

