Begum Akhtar Jayanti 2023: रेप, और कोठे की जिंदगी से उबर कर मल्लिका-ए-गजल बनने वाली बेगम अख्तर की रोमांचक कहानी
इसे संयोग ही कहेंगे कि गजल हो अथवा बेगम अख्तर, दोनों कभी कोठे की शान हुआ करते थे, और जब दोनों ने हिंदी सिनेमा संगीत से संगत किया, बेगम अख्तर मल्लिका-ए-गजल बन गई.
Begum Akhtar Jayanti 2023: भारत में गजल की चर्चा होगी तो बेगम अख्तर (Begum Akhtar) के बिना बात अधूरी रहेगी. इसे संयोग ही कहेंगे कि गजल हो अथवा बेगम अख्तर, दोनों कभी कोठे की शान हुआ करते थे, और जब दोनों ने हिंदी सिनेमा संगीत से संगत किया, बेगम अख्तर मल्लिका-ए-गजल (Mallika-e-Ghazal) बन गई. शास्त्रीय रागों पर आधारित गजल गायकी में बेगम अख्तर का कोई जवाब नहीं. सुविख्यात शायर कैफी आजमी ने एक बार बेगम अख्तर की मखमली आवाज से रचे गजलों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि उनकी समझ में गजल के दो ही मायने होते हैं पहला गजल और दूसरा बेगम अख्तर, 07 अक्टूबर 2023 को बेगम अख्तर की 109वीं जयंती पर आइये जानते हैं कोठे से गजलों की दुनिया की साम्राज्ञी बनने की कहानी...
संघर्ष भरा जीवन
7 अक्टूबर 1914 को फैजाबाद (उप्र) में एडवोकेट असगर हुसैन की दूसरी पत्नी मुस्तरी के गर्भ से पैदा हुई बेगम अख्तर का असली नाम अख्तरी बाई था. घर में उसे बिब्बी कहकर बुलाया जाता था. उसे बचपन से संगीत से प्रेम था, वह सिंगर बनना चाहती थी. लेकिन उसका परिवार उसकी इच्छा के खिलाफ था. अख्तरी 4 वर्ष की थीं, उनके पिता ने उन्हें छोड़ दिया. संघर्षों से जूझते हुए वह आगे, बढ़ती रहीं, लेकिन हार नहीं मानी, हालांकि इस जिद की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी थी. 7 वर्ष की आयु में वह जिस उस्ताद से गायकी सीख रही थीं, उसने उनका शारीरिक शोषण किया. कालांतर में उन्होंने उस्ताद इमदाद खान, अता मोहब्बत खान, अब्दुल वहीद खान से संगीत की शिक्षा प्राप्त की. 13 वर्ष की आयु में गाना सुनने के बहाने बिहार के राजा ने बुलाकर उसका बलात्कार किया. छोटी उम्र में एक बच्ची शमीमा की बिन ब्याही माँ बन गईं. हालांकि उसे अपनी बहन बताती रहीं.
करियर की शुरुआत
बेगम अख्तर को गायकी का पहला अवसर फिल्म बादशाह के लिए मिला था, लेकिन फिल्म फ्लॉप होने से उन्हें कोई लाभ नहीं मिला. वह अपने गृह नगर लखनऊ आ गई. लखनऊ में ही बेगम अख्तर की मुलाकात महबूब खान से हुई. महबूब खान बेगम की प्रतिभा से बहुत प्रभावित थे. उन्होंने उन्हें मुंबई बुलाया. इसके बाद उन्हें पीछे मुड़ कर देखने का अवसर ही नहीं मिला.
बेगम अख्तर गजल, ठुमरी, और दादरा गायन शैली की बेहद लोकप्रिय गायिका थीं. उनकी गाई कुछ गजलें ‘वो जो हममें तुममें क़रार था, तुम्हें याद हो के न याद हो’, ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’, ‘मेरे हमनफस, मेरे हमनवा, मुझे दोस्त बन के दवा न दे’, आज की पीढ़ी को भी दीवाना बना देती है. उनकी गायकी के चर्चे सुनकर ग्रामोफोन कंपनी ने उनसे गाना गाने की अपील की लेकिन उनके उस्ताद ने मना कर दिया, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से बेगम अख्तर ने एचएमवी कंपनी के साथ करार किया और दादरा और गजलें गाईं. यह उनकी गायकी का ही जादू था, जिसने गजल को कोठों से निकालकर आम लोगों के बीच लोकप्रिय किया. बेगम अख्तर ने ग़ालिब, मोमिन, फैज अहमद फैज, कैफ़ी आज़मी, शकील बदायुनी जैसे दिग्गज शायरों के कलाम गाए और इन कलाम को घर-घर में पहचान दिलाई.
निधन
साल 1974 में तिरुवनंतपुरम के पास बलरामपुर में अपने अंतिम संगीत कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी आवाज की रेंज बढ़ा दी, जिससे वह बीमार पड़ गई. अंततः 30 अक्टूबर 1974 को उनकी दोस्त नीलम गमाड़िया की बाहों में उनकी मृत्यु हो गई.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 07, 2023 09:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

