स्कूल जाते बच्चों की अच्छी याददाश्त के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं! जानें क्या हैं इन 5 टॉप ब्रेन फूड्स की खासियत!
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आज तेज भागती दुनिया में बड़े तो बड़े, बच्चे भी फास्ट फूड के प्रति ही दिलचस्पी दिखाते हैं, जो सेहत के नजरिये से किसी भी दृष्टिकोण सही नहीं होते. विशेषकर स्कूल जाते बच्चों के लिए तो पौष्टिक भोजन पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जो उनके मन-मस्तिष्क को स्वस्थ एवं सक्रिय रखे. उनकी याददाश्त को सुचारु बनाए, ताकि वे अपनी पढ़ाई के प्रति पूरी एकाग्रता बरत सके. आज ऐसे ही 5 विशेष प्रकार के भोज्य पदार्थों के बारे में बताया जा रहा है, जो स्कूल जाते बच्चों की मस्तिष्क के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं.

हरी सब्जियां

स्कूल जाते बच्चों के लिए ताजे फलों एवं भोजन में हरी सब्जियों का समावेश बहुत जरूरी होता है. इसमें शिमला मिर्च, गाजर, ब्रोकली तमाम लाभकारी यौगिक से युक्त होते हैं, जिनमें कैरोटीनॉयड भी शामिल है, इसके नियमित सेवन से मानसिक प्रदर्शन में निरंतर सुधार होता है. इसके अलावा कच्चा केला, पालक, तुलसी, हरी मटर, अजमोद इत्यादि लेट्यूस ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन के समृद्ध स्रोत होते हैं, जो बच्चों के मस्तिष्क को सक्रिय रखने में मदद करते हैं. इन हरी सब्जियों को सलाद के रूप में सेवन करने से भी बच्चे मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त एवं स्वस्थ रहते हैं. यह भी पढ़ें : चावल खाने वाले हो जाएं सावधान, इससे आपकी सेहत को हो सकते हैं ये बड़े नुकसान

नट और बीज

विटामिन ई और जिंक जैसे आवश्यक विटामिन से भरपूर नट्स (सूखे मेवे) में तमाम पौष्टिक तत्व होते हैं, जो पढ़ते बच्चों के स्नैक्स के बेहतर विकल्प हो सकते हैं. नट्स में जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर, आयरन, स्वास्थ्यवर्धक फैट, प्रोटीन और फाइबर के मुख्य स्रोत होते हैं. अध्ययन के दौरान यह आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है. इसलिए दिन में एक बार पढ़ते बच्चों को नट्स का सेवन जरूर करवाना चाहिए. शोधों से पता चला है कि नट्स का सेवन आपके मस्तिष्क के समग्र कामकाज को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नट्स में स्वस्थ वसा, विटामिन ई और ओमेगा-3 से युक्त है.

अंडे के संपूर्ण हिस्से का सेवन 

किसी भी स्कूल जाते बच्चों के लिए अंडे सर्वोत्तम ब्रेकफास्ट हो सकते हैं. नास्ता नहीं तो भोजन में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. अंडे के सेवन से स्नायविक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है. अंडे में विटामिन बी 6, बी 12, फोलेट, और कोलीन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जो मूड और याददाश्त को नियंत्रित करने के लिए न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन बनाता है. इसके अलावा कोलीन, सेलेनियम, ल्यूटिन और कैरोटिनॉइड की उपस्थिति के कारण अंडे को अक्सर प्रकृति के मल्टीविटामिन के रूप में जाना जाता है. लेकिन ध्यान रहे, पढ़ने-लिखने वाले बच्चों को अंडे का संपूर्ण भाग दें, केवल सफेद वाला भाग नहीं.

मछली से मस्तिष्क का संबंध

ओमेगा-3 का सबसे अहम स्त्रोत मछली है, जिसमें मस्तिष्क को स्वस्थ बनाने के तमाम तत्व मौजूद होते हैं. मछली पर हुए तमाम शोधों से इस बात की पुष्टि होती है कि मछली को आहार में शामिल करने से मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ती है. मछली के नियमित सेवन से एक ओर जहां मानसिक प्रदर्शन में सुधार आता है, वहीं मानसिक कमजोरी को दुरुस्त करता है.

बेरी और बीट्स

बेरी मस्तिष्क को शार्प बनाने में अहम भूमिका निभाता है. अनार से खून तो बनता ही है, साथ ही याददाश्त भी बढ़ता है. अनार में मौजूद पॉलीफेनॉल्स नामक मॉलिक्यूल ब्लड-ब्रेन बैरियर को क्रॉस कर न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से सुरक्षित रखता है. बेरी की तरह बीट्स भी मस्तिष्क के लिए काफी कारगर माना जाता है. इसमें नाइट्रिक ऑक्साइड मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, और तंत्रिका कोशिका संचार, रक्त प्रवाह एवं मस्तिष्क के कार्य को उत्तेजित करता है. भोजन के साथ चुकंदर अथवा चुकंदर का रस शामिल कर आप बच्चे को नाइट्रिक ऑक्साइड देते हैं, जिससे मस्तिष्क सक्रिय होता है.