Valmiki Jayanti 2025: वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक प्रेरक और प्रभावशाली भाषण!
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Valmiki Jayanti 2025:  महर्षि वाल्मीकि का जन्म आश्विन मास शरद पूर्णिमा यानी आज 6 अक्टूबर 2025 को हुआ था. एक डाकू से महात्मा बने महर्षि वाल्मीकि की जयंती के पावन अवसर पर प्रस्तुत है, कॉलेज प्रांगण में देने योग्य एक प्रभावशाली और प्रेरक भाषण. मान्यवर, मुख्य अतिथि महोदय, आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण, अभिभावक गण एवं मेरे प्रिय मित्रों, आप सभी को मेरा सादर नमस्कार.

आज हम यहां अपने कॉलेज प्रांगण में वाल्मीकि जयंती के पुनीत अवसर पर एकत्र हुए हैं, यह दिन ना केवल एक महर्षि, महाकवि और महान संत को याद करने का है, बल्कि यह दिन हम प्रेरणा देता है कि हम सच्चे मन से अगर आत्म परिवर्तन और ज्ञान प्राप्ति का प्रयास करें, तो हम अपने लक्ष्य को पाकर रहते हैं.ये भी पढ़े:Valmiki Jayanti 2025: वाल्मीकि और श्रीराम से जुड़े कुछ रोचक एवं अनछुए प्रसंग! जानें कैसे लिखी वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण!

  हिंदू धर्म शास्त्रों में महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि कहा गया है, जिन्होंने विश्व को रामायण जैसा महान ग्रंथ भेंट किया. शायद आप नहीं जानते होंगे कि वाल्मीकि शुरू से विद्वान नहीं थे. वस्तुतः उनका प्रारंभिक जीवन एक डाकू के रूप में गुजरा. उनका मूल नाम रत्नाकर था, जो राह चलते यात्रियों को लूटकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. इसी घटना क्रम में एक बार उनकी मुलाकात महामुनि नारद से हुई. नारद मुनि ने उन्हें आत्मज्ञान दिया. महामुनि के आत्मज्ञान से प्रभावित होकर रत्नाकर डाकू ने आत्मबोध, आत्मचिंतन और पापों से मुक्ति के लिए कठोर तपस्या किया. अंततः उनकी तपस्या पूरी हुई. वह रत्नाकर से महाकवि वाल्मीकि बन गये. महानता की चरम पर पहुंचने के बाद उन्हें प्रभु श्रीराम से साक्षात्कार तक का दिव्य अनुभव प्राप्त हुआ, जिसके बाद ही वह महाकाव्य रामायण लिखने में सफल हुए.

  साथियों, इस घटना से हमें बहुत कुछ सीख मिलती है, कि इंसान कितना भी कलंकित क्यों ना हो, उसने कितने भी अपराध किये हों, अगर वह सच्चे मन से आत्म चिंतन और आत्मबोध कर, नये मार्ग पर चलना चाहे, तो वह अवश्य सफल हो सकता है, वह महानता को प्राप्त कर सकता है. वाल्मीकि के जीवन में परिवर्तन का मूल मंत्र था, ज्ञान, तपस्या और आत्मबोध.    

    संस्कृत रचित महाकाव्य रामायण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने संसार को धर्म, कर्तव्य, प्रेम, त्याग और आदर्श जीवन सिद्धांतों से परिचय कराया. श्री राम के चरित्र को उन्होंने इस तरह लेखनीबद्ध किया कि आज हर कोई रामायण पढ़ने और उसे अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करता है.

    मित्रों, आज के परिप्रेक्ष्य में, विशेषकर आज की पीढ़ी के लिए रामायण एक सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक साबित हो सकता है. इस तेज भागती दुनिया में हम सभी को महर्षि वाल्मीकि के जीवन से सीख लेनी चाहिए, कि हम कितनी भी बुरी संगत में फंसे हों, बुरे कार्यों में लिप्त हो गये हों, अगर हम सच्ची साधना करें तो इससे ना केवल मुक्ति पाई जा सकती है, बल्कि अपनी गल्तियों से सीखकर खुद में आमूल परिवर्तन ला सकते हैं. हमारे द्वारा प्राप्त ज्ञान और साहित्य हमें शिखर तक पहुंचा सकता है, अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं.

  मित्रों महर्षि वाल्मीकि के जीवन चरित्र से सबक लेते हुए आइये हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे, दूसरों को प्रेरित करें, तथा एक स्वस्थ और आदर्श समाज का हिस्सा बनेंगे.

महर्षि वाल्मीकि जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!