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क्या भारत अब रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा? नए अमेरिकी प्रतिबंधों ने बढ़ाई मुश्किल, जानें तेल के खेल का पूरा सच

अमेरिका ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों (रोसनेफ्ट और ल्यूकऑयल) पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसके चलते, भारत की तेल कंपनियां जैसे रिलायंस और इंडियन ऑयल अब रूस से तेल का आयात कम करने की तैयारी कर रही हैं. इस कदम से भारत को अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत (ट्रेड डील) में फायदा मिलने की उम्मीद है.

क्या भारत अब रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा? नए अमेरिकी प्रतिबंधों ने बढ़ाई मुश्किल, जानें तेल के खेल का पूरा सच
(Photo : X)

US Sanctions on Russian Oil: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार रूस पर कुछ नए और "ज़बरदस्त" प्रतिबंध लगा दिए हैं. ये प्रतिबंध रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट (Rosneft) और ल्यूकऑयल (Lukoil) पर लगाए गए हैं.

अमेरिका का कहना है कि वो ये कदम इसलिए उठा रहा है ताकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन का युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाया जा सके. अमेरिकी खजाना सचिव (US Treasury Secretary) स्कॉट बेसेन्ट के मुताबिक, ये कंपनियां क्रेमलिन (रूसी सरकार) की "युद्ध मशीन" को पैसा दे रही हैं.

भारत पर इसका असर क्यों?

सीधी सी बात है, भारत दुनिया के उन देशों में से एक है, जो रूस से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदता है. 2025 के पहले नौ महीनों में ही भारत ने रूस से लगभग 17 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदा. क्योंकि भारत की तेल रिफाइनरियां रूसी तेल पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं, इसलिए इन नए प्रतिबंधों का सीधा असर भारत की सप्लाई पर पड़ सकता है.

भारत की तेल कंपनियां क्या कर रही हैं?

ख़बरों के मुताबिक, इन नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत की तेल रिफाइनरियों ने रूस से तेल का आयात तेज़ी से कम करने की तैयारी शुरू कर दी है.

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज: जो रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीदती है, उसने भी आयात कम करने या रोकने का फैसला किया है. रिलायंस का रोसनेफ्ट के साथ एक बड़ा लंबा कॉन्ट्रैक्ट भी है, जिस पर अब दोबारा सोचा जा रहा है. कंपनी का कहना है कि वह भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के हिसाब से ही चलेगी.
  • सरकारी कंपनियां: इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां भी अपने सभी कागज़ात (डॉक्यूमेंट्स) की जाँच कर रही हैं. वे यह पक्का करना चाहती हैं कि उनकी सप्लाई सीधे तौर पर रोसनेफ्ट या ल्यूकऑयल से न आ रही हो. एक सूत्र ने कहा, "आयात में भारी कटौती होगी."

क्या भारत को तेल मिलना बंद हो जाएगा?

शायद नहीं. पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत की सरकारी तेल कंपनियां वैसे भी रूसी तेल सीधे इन कंपनियों से नहीं, बल्कि बिचौलियों (intermediaries) के ज़रिए खरीदती हैं. साथ ही, भारत का इन दोनों कंपनियों के साथ कोई पक्का (फिक्स्ड) कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं है.

सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस से तेल खरीदना पहले ही कम कर दिया था और दूसरे देशों से ज़्यादा तेल मंगाया जा रहा था. भारत के पास कई अलग-अलग देशों से तेल आ रहा है, इसलिए सप्लाई की कोई कमी नहीं होगी.

क्या इसका कोई फायदा भी है? (भारत-अमेरिका ट्रेड डील)

हाँ, इस कदम का एक बड़ा फायदा हो सकता है.

अभी भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 50% तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगता है. कहा जा रहा है कि इसमें से आधा टैक्स अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इसलिए लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था.

अब जब भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है, तो हो सकता है कि अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक बातचीत (ट्रेड डील) में भारत को राहत मिल जाए. अमेरिका भारत पर लगे इन भारी टैक्स को कम कर सकता है, जिससे भारतीय सामान को अमेरिकी बाज़ार में फायदा होगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 24, 2025 12:15 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).