Rabies Scare in UP Village: यूपी के पिपरौली गांव में रेबीज़ का खौफ़, तेरहवीं भोज में कुत्ते के काटे भैंस के दूध से बना ‘रायता’, खाने के बाद करीब 200 ग्रामीणों को लगा टीका
रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीण तेरहवीं भोज में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने भोज के साथ रायता खिलाय गया. कुछ दिन बाद भैंस की मौत हो गई, जिसके बाद लोगों में शक हुआ कि भैंस की मौत कुत्ते के काटने से ही हुई होगी. यह खबर फैलते ही ग्रामीण घबराए और बड़ी संख्या में उजानी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचकर रेबीज़ का टीका लगवाया.
Rabies Scare in UP Village: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के पिपरौली गांव में रेबीज़ को लेकर हड़कंप मच गया है. यहां तेरहवीं भोज में कुत्ते के काटे भैंस के दूध से बना ‘रायता’ खाने के बाद करीब 200 ग्रामीणों को एहतियातन रेबीज़ वैक्सीन लगाई गई. यह मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों को पता चला कि जिस भैंस के दूध से रायता बनाया गया था, उसे कुछ दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था. घटना 23 दिसंबर को हुए एक तेरहवीं भोज से जुड़ी है.
जानें कैसे सामने आया मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीण तेरहवीं भोज में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने भोज के साथ रायता खिलाय गया. कुछ दिन बाद भैंस की मौत हो गई, जिसके बाद लोगों में शक हुआ कि भैंस की मौत कुत्ते के काटने से ही हुई होगी. यह खबर फैलते ही ग्रामीण घबराए और बड़ी संख्या में उजानी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचकर रेबीज़ का टीका लगवाया. यह भी पढ़े: Goregaon Dog Attack Video: मुंबई के गोरेगांव में स्कूल में चौकीदार पर कुत्ते ने अचानक किया हमला; कंधे पर चढ़कर काटा
बच्चों को भी लगा टीका
स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत जांच शुरू की और एहतियातन सभी लोगों को पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफाइलेक्सिस (PEP) यानी रेबीज़ टीकाकरण देने का फैसला किया. शुरुआती जानकारी के अनुसार, 190 से अधिक ग्रामीणों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, को पहला डोज़ लगाया गया है.
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
जैसे ही मामला सामने आया, जिला स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों को गांव भेजा और मास वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू की. स्वास्थ्यकर्मी घर-घर सर्वे कर अन्य संभावित प्रभावित लोगों की पहचान कर रहे हैं, ताकि किसी को भी जोखिम में न छोड़ा जाए. स्वास्थ्य विभाग के अन्सुअर यह सावधानी इसलिए बरती गई क्योंकि रेबीज़ एक जानलेवा बीमारी है और लक्षण दिखने के बाद इसका इलाज लगभग असंभव है.
रेबीज़ का खतरा क्या होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही दूध पीने या दूध से बने पदार्थ खाने से रेबीज़ फैलने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन भैंस की संदिग्ध मौत को देखते हुए टीका लगाना आवश्यक माना गया, रेबीज़ आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने या खरोंच से फैलता है, और समय रहते टीकाकरण ही इसका एकमात्र बचाव है.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 29, 2025 11:45 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

