UP Local Elections: राज्य जीतने के बाद अब शहरों की बारी, बीजेपी नगर निगम
बीजेपी (Photo Credits PTI)

लखनऊ, 7 सितंबर: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले नगर निगम के चुनाव यानी शहर की सरकार का शोर शुरु हो चुका है. बीजेपी ने कमर कस ली है और जीत के लिए रणनीति भी तैयार हो चुकी है. यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद सिंह चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी ने मोर्चा संभाल लिया है. यूपी की 199 नगर पालिका परिषद, 438 नगर पंचायत सीटों के लिए मतदान होना है. हालांकि अभी चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन नवंबर-दिसंबर के बीच यूपी में गांव की सरकार का चुनाव होना तय माना जा रहा है. जैसा कि हम सब जानते हैं बीजेपी के लिए कोई भी चुनाव छोटा या बड़ा नहीं होता. यह भी पढ़ें: Uttarakhand सरकार चारधाम यात्रा रूट पर शुरू करेगी नये अस्पताल

बीजेपी हमेशा चुनावी मोड में रहती है. निकाय चुनाव के लिए भले ही तारीखों का ऐलान न हुआ हो लेकिन सभी नगर निकायों को मंथने का प्लान बीजेपी बना चुकी है. बीजेपी ने मंडल, जिला, बूथ में कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देने के लिए योजना बना ली है. मैदान पर यूपी बीजेपी के चौधरी यानी भूपेंद्र सिंह चौधरी और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी उतर चुके हैं. बीजेपी के लिए ये चुनाव इसलिए भी जरुरी हैं क्योंकि, 2024 के चुनाव से पहले ये किसी सेमिफाइनल से कम नहीं है.

2017 नगर निगम चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने 16 नगर निगमों से 14 पर जीत हासिल की थी. हालांकि नगर पालिका परिषद की बात करें तो बीजेपी को 198 सीटों में 47 पर ही संतुष्ट होना पड़ा था. वहीं नगर पालिका परिषद में समाजवादी पार्टी को 29, बहुजन समाज पार्टी को 18 और कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिली थी. बाकि बची सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली थी.

अब बात नगर पंचायत की 438 सीेटों की करें तो 2017 में बीजेपी ने 81, सपा ने 67, बसपा 34 और कांग्रेस ने 15 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. वहीं यूपी बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि, बीजेपी के लिए हर चुनाव जरुरी होता है. इस बार बीजेपी नगर निगमों के चुनाव में पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन करेगी. नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत के चुनाव के नतीजों में सुधार के लिए भी हम काम कर रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने पहले से ही उन सीटों पर फोकस कर लिया है जहां पिछली बार के चुनाव में प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा था. बीजेपी का संगठन मोर्चे पर डटा हुआ है और शहर की सरकार बनाने पर पूरा फोकस है.