Women’s Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण विधेयक 2026 (Women’s Reservation Bill) को लेकर देशभर से समर्थन की आवाजें तेज हो गई हैं. सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों ने इस विधेयक को शासन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने वाला एक परिवर्तनकारी कदम बताया. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी (Union Minister Annpurna Devi) ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक वर्षों के संघर्ष का फल है और आधी आबादी को उनका हक दिलाने का माध्यम बनेगा. यह भी पढ़ें: Jan Vishwas Bill 2026: राज्यसभा में पास हुआ जन विश्वास बिल, 16 अप्रैल को महिला आरक्षण पर होगी अहम चर्चा
संसद का विशेष सत्र और राजनीतिक दलों से अपील
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और महिला उत्थान के लिए इस विधेयक को पारित कराने में सहयोग करने का आग्रह किया.
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2029 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त है.
राष्ट्रीय महिला आयोग और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने कहा कि देशभर की महिलाएं इस विशेष सत्र को लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा, ‘जब महिलाएं मुख्यधारा में आती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार को बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को ऊपर उठाती हैं.’ रहाटकर के अनुसार, यह विधेयक केवल संख्या बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक आकांक्षाओं को समझने और विकास में योगदान देने की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा.
कला और अध्यात्म जगत का समर्थन
विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने भी इस कदम की सराहना की है:
- शोवना नारायण (कथक नृत्यांगना): उन्होंने कहा कि अवसर मिलने पर महिलाओं का आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ेगी, जिससे पूरे भारत को लाभ होगा.
- जय मदान (आध्यात्मिक गुरु): उन्होंने समानता पर जोर देते हुए कहा कि संसद में भी उसी तरह समानता होनी चाहिए जैसे हमारे राष्ट्रीय गीतों में देवी दुर्गा और लक्ष्मी का सम्मान होता है. 33 प्रतिशत आरक्षण इस दिशा में एक सही शुरुआत है.
2029 के लक्ष्य पर टिकी नजरें
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सुनी जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, खेल, मीडिया और स्वास्थ्य सेवा जैसे विविध क्षेत्रों की महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा. अब सबकी निगाहें संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहाँ इस ऐतिहासिक कानून के भविष्य का फैसला होना है.












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