मध्य प्रदेश में ममता और बहादुरी की मिसाल, बच्चों को बचाने के लिए मधुमक्खियों से भिड़ीं कंचन नाम की महिला, खुद घायल होकर गंवाई जीवन; VIDEO

नीमच (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के नीमच जिले से दिल दहला देने वाली लेकिन बेहद साहसी खबर सामने आई है. रानपुर गांव के एक आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन बनाने वाली 45 वर्षीय कंचन बाई मेघवाल ने मातृत्व और वीरता की अनूठी मिसाल पेश की है. सोमवार को जब मधुमक्खियों के एक बड़े झुंड ने आंगनवाड़ी परिसर में खेल रहे 20 मासूम बच्चों पर हमला किया, तो कंचन बाई ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों को सुरक्षित बचाया. हालांकि, इस प्रक्रिया में वह खुद सैकड़ों मधुमक्खियों के डंक का शिकार हो गईं और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

अचानक हुआ मधुमक्खियों का हमला

घटना सोमवार दोपहर की है जब नीमच जिले के जावद तहसील अंतर्गत रानपुर गांव के आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चे बाहर खेल रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास के एक पेड़ से अचानक मधुमक्खियों का झुंड उखड़ा और बच्चों को घेर लिया. बच्चों की चीख-पुकार सुनकर परिसर में ही मौजूद कंचन बाई तुरंत हरकत में आईं.

बच्चों के लिए बनीं सुरक्षा कवच

कंचन बाई ने बच्चों को बचाने के लिए पास में रखी दरी और तिरपाल उठाई और उन्हें ढंकते हुए सुरक्षित कमरों की ओर धकेलना शुरू किया. उन्होंने एक-एक करके सभी 20 बच्चों को सुरक्षित कमरे के अंदर कर दिया और बाहर से दरवाजा बंद कर लिया. इस दौरान हजारों मधुमक्खियों ने कंचन बाई को पूरी तरह घेर लिया और उनके चेहरे व शरीर पर बार-बार डंक मारे.

अस्पताल में तोड़ा दम, गांव में शोक की लहर

जब तक ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे, कंचन बाई बेहोश हो चुकी थीं. उन्हें तुरंत नजदीकी सरवानिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. कंचन बाई 'जय माता दी' स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष थीं और गांव में काफी सक्रिय रहती थीं. उनके निधन से पूरे गांव में मातम छाया हुआ है.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

कंचन बाई अपने परिवार की मुख्य आधार थीं. उनके पति शिवलाल पिछले काफी समय से पैरालिसिस (लकवा) से जूझ रहे हैं. उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं, जिनके सिर से मां का साया उठ गया है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कंचन बाई की वीरता को देखते हुए उनके परिवार को उचित आर्थिक सहायता दी जाए.