नई दिल्ली/कोलकाता: देशभर से खाने में छिपकली (Lizard) मिलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाती हैं. ताजा मामला पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दक्षिण 24 परगना जिले (South 24 Parganas District) का है, जहां एक आंगनवाड़ी केंद्र (Anganwadi Centre) में दूषित भोजन करने से 15 बच्चे बीमार पड़ गए. इसी तरह की घटनाएं हाल ही में तेलंगाना (Telangana) और आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) से भी रिपोर्ट की गई हैं, जिससे आम जनता में डर का माहौल है. यह भी पढ़ें: Lizard Found in Food: गुजरात ट्रांसपोर्ट की बस के ड्राइवर के खाने में मिली मरी हुई छिपकली, शख्स की तबियत बिगड़ी, गुजरात के तारापुर चौकड़ी का वीडियो आया सामने;VIDEO
पश्चिम बंगाल: आंगनवाड़ी केंद्र में 15 बच्चे बीमार
दक्षिण 24 परगना जिले के रायदिघी स्थित नागेंद्रपुर उत्तरपारा आईसीडीएस (आंगनवाड़ी) केंद्र में गुरुवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब बच्चों के खाने में एक मरी हुई छिपकली पाई गई। केंद्र में दोपहर का भोजन परोसा जा रहा था, तभी एक बच्चे की थाली में छिपकली दिखी. तब तक कई बच्चे भोजन कर चुके थे.
भोजन करने के कुछ ही समय बाद बच्चों ने पेट दर्द, घबराहट और उल्टी की शिकायत की. सभी 15 बच्चों को तुरंत रायदिघी ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय विधायक और डॉक्टर अलोक जलदाता ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बच्चों के इलाज की निगरानी की। ब्लॉक प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और अभिभावकों ने रसोइए की बर्खास्तगी की मांग की है.
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी सामने आई लापरवाही
खाद्य सुरक्षा में लापरवाही का यह कोई अकेला मामला नहीं है। हाल ही में तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले में एक टिफिन सेंटर पर परोसे गए भोजन में छिपकली मिलने से 4 लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए थे. इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश के गुंटूर में भी एक ग्राहक द्वारा खरीदे गए बिरयानी के पैकेट में छिपकली मिलने का मामला सामने आया था। इन घटनाओं के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं. यह भी पढ़ें: Lizard Found in Tandoori Roti: बाप रे! अब तंदूरी रोटी में निकली मरी हुई छिपकली, कानपुर के ढाबे की बड़ी लापरवाही; VIDEO
खाद्य सुरक्षा पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
लगातार सामने आ रही ये घटनाएं देश में खाद्य सुरक्षा के दावों की पोल खोल रही हैं. सरकारी केंद्रों से लेकर निजी भोजनालयों तक, स्वच्छता का अभाव और निरीक्षण में ढिलाई आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है.
अभिभावकों और ग्राहकों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन घटनाओं के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन क्या कड़े कदम उठाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही को रोका जा सके. फिलहाल, अस्पताल में भर्ती बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और प्रशासन मामले की तह तक जाने की बात कर रहा है.













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