सीधी, मध्य प्रदेश: मानसून में कही सड़क नहीं तो कही खराब सड़क होती है.जिसके कारण लोगों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन जब ये अपनी गुहार लेकर सांसद या नेता के पास जाते है तो इन्हें अजीब जवाब दिया जाता है. ऐसा ही एक वीडियो मध्य प्रदेश के सीधी जिले से सामने आया है. जहांपर सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर लीला साहू ने अपने गांव की टूटी सड़क को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई. लेकिन उन्हें उम्मीद से उल्टा जवाब मिला, जो अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है.लीला साहू पिछले करीब एक साल से लगातार अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाकर सड़क की हालत दिखा रही थीं. उनका मकसद था कि प्रशासन या जनप्रतिनिधि इस पर ध्यान दें और गांव तक पक्की सड़क बनवाई जाए.
लेकिन सांसद ने कुछ ऐसा जवाब दिया कि अब वह वायरल हो गया है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @nedricknews नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Video: सिस्टम से नाराज महिला का अनोखा प्रदर्शन! सड़क और नाली नहीं होने से कीचड़ भरे रास्ते पर दण्डवत परिक्रमा की, मध्यप्रदेश के श्योपुर का वीडियो वायरल
सड़क बनाने पर सांसद का अजीब बयान
"डिलीवरी की डेट बताओ...एक हफ्ता पहले उठवा लेंगे"
- 9 महीने की गर्भवती लीला साहू ने मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सड़क की मांग उठाया तो भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने उनकी डिलीवरी की तारीख पूछते हुए कहा- "तारीख बताओ, हम तुम्हें एक हफ्ता पहले उठवा लेंगे"
- वहीं, मंत्री राकेश सिंह… pic.twitter.com/1F4mSjACGh
— Nedrick News (@nedricknews) July 12, 2025
‘डिलीवरी डेट बताओ, पहले ही हॉस्पिटल भेज देंगे’
जब लीला के एक वीडियो को लेकर सीधी के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद असंवेदनशील बयान दे डाला. उन्होंने कहा कि अगर सड़क से हॉस्पिटल पहुंचने की चिंता है तो डिलीवरी की तारीख पहले से बता दें, हम एक हफ्ते पहले ही हॉस्पिटल पहुंचा देंगे.
सांसद ने ठेकेदारों पर डाला जिम्मा
डॉ. मिश्रा ने कहा कि सड़क बनाना सांसद का काम नहीं है, बल्कि यह इंजीनियरों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी होती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने सड़क निर्माण को लेकर कुछ नहीं किया. हालांकि, इस बात को नजरअंदाज कर गए कि इलाके से पिछली बार भी भाजपा की ही सांसद थीं.लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी लीला के वीडियो को गंभीरता से नहीं लिया. उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर कोई भी कुछ भी पोस्ट करता है, इससे सड़क नहीं बनती.बजट सीमित होता है और योजनाएं तय प्रक्रिया से बनती हैं, न कि ऑनलाइन ट्रेंड के आधार पर.













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