Leopard Scare: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में तेंदुए का आतंक, CRPF कैंप में घुसा तेंदुआ; जवान घायल
प्रतीकात्मक तस्वीर (Pixabay)

Leopard Scare in Anantnag: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के अनंतनाग (Anantnag) जिले में बुधवार को एक तेंदुआ (Leopard) CRPF कैंप में घुस गया और कैंप के अंदर एक जवान पर हमला करके उसे घायल कर दिया. अधिकारियों ने बताया कि जिले के कापरान CRPF कैंप में एक तेंदुआ घुस गया, जिससे वहां दहशत और अफरा-तफरी मच गई. अधिकारियों ने बताया, 'हेड कांस्टेबल कमलेश्वर कुमार तेंदुए के हमले में घायल हो गए. उन्हें स्थानीय प्राइमरी हेल्थ सेंटर में फर्स्ट एड दिया गया और अब उनकी हालत स्थिर है. वह कैंप में वापस आ गए हैं.' तेंदुए को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए वन्यजीव संरक्षण विभाग के फील्ड स्टाफ को बुलाया गया है. यह भी पढ़ें: VIDEO: हरिद्वार के रिहायशी इलाके में पहुंचा तेंदुआ, पेड़ पर चढ़ा और वही लटका, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

हाल ही में उत्तरी कश्मीर के सोपोर के एक गांव में एक तेंदुए ने भेड़ों के झुंड पर हमला किया, जिसमें कम से कम सात भेड़ें मारी गईं और कई अन्य घायल हो गईं. इस घटना से गांव वालों में डर फैल गया और उन्होंने वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट से अपील की कि तेंदुए को पकड़ने के लिए टीमें भेजी जाएं, ताकि वो और नुकसान पहुंचाने से पहले पकड़ा जाए. वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट की एक टीम ने उस जंगली जानवर को ट्रैक करने और पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया. सितंबर में दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के चेत्रगाम इलाके में एक तेंदुए के हमले में आठ साल का एक लड़का घायल हो गया था.

पिछले एक दशक में घाटी में इंसान-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) यानी एचडब्ल्यूसी (HWC) की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ गई हैं. यहां अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिनमें भालू और तेंदुए जैसे जंगली जानवर गांवों में घुसकर पालतू जानवरों को खा जाते हैं, बच्चों पर हमला करते हैं या गांव वालों को घायल कर देते हैं. इंसान-वन्यजीव संघर्ष यानी HWC का मतलब है इंसानों और जंगली जानवरों के बीच नकारात्मक टकराव, जिसके एक तरफ लोगों और उनके संसाधनों के लिए और दूसरी तरफ वन्यजीवों और उनके रहने की जगहों के लिए बुरे नतीजे होते हैं. इंसानों और वन्यजीवों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के लिए होने वाले संघर्ष से इंसानों की खाने की सुरक्षा और इंसानों और दूसरे जानवरों की भलाई पर असर पड़ता है. यह भी पढ़ें: Leopard Attack: भायंदर में तेंदुए का हमला, ठाणे में रिहायशी बिल्डिंग में घुसा तेंदुआ; 4 लोग घायल (Watch Video)

कई इलाकों में पिछले कुछ दशकों में इंसानों की आबादी बढ़ने और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव के कारण इन टकरावों की संख्या बढ़ी है. HWC शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के इलाकों में सस्टेनेबल डेवलपमेंट, खाने की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक गंभीर वैश्विक खतरा है. आम तौर पर, HWC के नतीजों में शामिल हैं: फसलों का बर्बाद होना, खेती की पैदावार में कमी, चरागाहों और पानी की सप्लाई के लिए मुकाबला, पालतू जानवरों पर हमला, इंसानों को चोट लगना और मौत, इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान,जंगली जानवरों और पालतू जानवरों के बीच बीमारियों के फैलने का बढ़ा हुआ खतरा. राष्ट्रीय स्तर पर, वानिकी, वन्यजीव, कृषि, पशुधन और दूसरे संबंधित क्षेत्रों के बीच सहयोग जरूरी है.