Pudukkottai Jallikattu Event: तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले के श्री पिडारी अम्मन मंदिर में हुआ जलीकट्टू उत्सव, 300 युवक और 750 बैल कार्यक्रम में पहुंचे (Watch Video)
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पुदुक्कोट्टई,तमिलनाडु: तमिलनाडु की पारंपरिक विरासत का प्रतीक जलीकट्टू खेल एक बार फिर पुदुक्कोट्टई जिले के थिरुवारंकुलम में श्री पिडारी अम्मन मंदिर के वार्षिक उत्सव के अंतर्गत आयोजित किया गया. इस भव्य आयोजन में 750 से अधिक बैल और 300 से ज्यादा युवक विभिन्न जिलों से भाग लेने पहुंचे. ये उत्सव एक बड़ा उत्सव माना जाता है और राज्य के विभिन्न जिलों और गांवों में इसे धूमधाम से मनाया जाता है. हालांकि कई बार इस खेल में युवक घायल भी होते है. लेकिन फिर भी इस उत्सव का रोमांच ख़त्म नहीं होता. ये भी पढ़े:तमिलनाडु में जलीकट्टू की धूम, देखिए बैलों को पकड़ने का ये खतरनाक खेल

जलीकट्टू उत्सव शुरू 

परंपरा, रोमांच और साहस का संगम

रंग-बिरंगे आभूषणों से सजे बैलों को जब मैदान में छोड़ा गया तो दर्शकों की भीड़ ने जोरदार तालियों और नारों से युवाओं का हौसला बढ़ाया.युवाओं ने बैल की पीठ पर स्थित कूबड़ को पकड़ने और उसे वश में करने का साहसिक प्रयास किया. हर सफल प्रयास पर दर्शकों के बीच रोमांच चरम पर पहुंच गया.

तमिल संस्कृति की पहचान है जलीकट्टू

जलीकट्टू तमिलनाडु में पोंगल जैसे फसल उत्सव के दौरान खेले जाने वाला प्राचीन खेल है. यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण साहस और तमिल संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है. बैल पालने वालों के लिए यह गर्व और परंपरा का विषय है, वहीं युवाओं के लिए यह शौर्य प्रदर्शन का मंच है.

मदुरै का जलीकट्टू बना वैश्विक आकर्षण

जनवरी में मदुरै जिले के अवनीयापुरम, पालामेडु और आलंगनल्लूर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के जलीकट्टू आयोजनों में इस साल 1,100 बैल और 900 बैल पकड़ने वाले युवक शामिल हुए थे.सर्वश्रेष्ठ बैल को 11 लाख रूपए की कीमत का ट्रैक्टर,और सर्वश्रेष्ठ तामेर (बैल पकड़ने वाला) को 8 लाख रूपए की कार भेंट की गई थी.प्रत्येक बैल केवल एक कार्यक्रम में ही भाग ले सकता है, और आयोजकों को पहले से सरकारी वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होता है. प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया था.

पुदुक्कोट्टई में आयोजन की भव्यता

पुदुक्कोट्टई के इस आयोजन में भी सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद थीं. स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति और स्वयंसेवकों की देखरेख में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि तमिलनाडु की लोक परंपराएं आज भी पूरी भव्यता और जनसमर्थन के साथ जीवित हैं. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @ians_india नाम के हैंडल से शेयर किया गया है.