Who Was Aalin Sherin Abraham? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 22 फरवरी को 'मन की बात' कार्यक्रम के 131वें एपिसोड के दौरान केरल की नन्ही आलिन शेरिन अब्राहम को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. आलिन केरल की अब तक की सबसे कम उम्र की अंगदाता (Organ Donor) बनी हैं. प्रधानमंत्री ने आलिन के माता-पिता के "अतुलनीय साहस" की सराहना की, जिन्होंने अपनी नवजात बेटी की ब्रेन-डेथ के बाद उसके अंग दान करने का कठिन फैसला लिया.
कौन थीं आलिन शेरिन अब्राहम?
आलिन का जन्म केरल के पतनमथिट्टा निवासी शेरिन और अब्राहम के घर हुआ था. जन्म के कुछ समय बाद ही उसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा. कोट्टायम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया था. इस गहरे दुख के बीच भी उसके माता-पिता ने अंगदान की सहमति दी. पीएम मोदी ने इस निर्णय को अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों लोगों के लिए "आशा की किरण" बताया. यह भी पढ़े: सम में पहली बार नेशनल हाईवे बना ‘रनवे’: पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ में इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा का किया उद्घाटन, लड़ाकू विमानों ने दिखाया दम (See Pics and Video)
पीएम मोदी ने आलिन शेरिन अब्राहम को किया याद
India pays homage to Alin Sherin Abraham from Kerala.
The decision of her parents, Mr. Arun Abraham and Mrs. Sherin Ann John, to donate her organs will inspire generations to come. #MannKiBaat pic.twitter.com/KiTImUpIgO
— Narendra Modi (@narendramodi) February 22, 2026
जटिल प्रक्रिया और सफल प्रत्यारोपण
केरल के 'मृुथसंजीवनी' (Mrithasanjeevani) कार्यक्रम के तहत आलिन के गुर्दे (Kidneys) और लिवर को सफलतापूर्वक निकाला गया. नवजात की उम्र और छोटे आकार के कारण यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण थी. कोट्टायम मेडिकल कॉलेज और कोच्चि के एस्टर मेडसिटी की मेडिकल टीमों ने समन्वय के साथ इस कार्य को पूरा किया, जिससे कई लोगों को नया जीवन मिला.
अंगदान: भारत में बढ़ती जागरूकता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आलिन की कहानी केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा योगदान है. उन्होंने देश में अंगदान के आंकड़ों पर चर्चा करते हुए कहा कि हालांकि जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन दाताओं और जरूरतमंदों के बीच का अंतर अभी भी बहुत बड़ा है. सरकार का लक्ष्य आलिन जैसे मामलों के माध्यम से अंगदान से जुड़े भ्रमों को दूर करना है.
केरल की 'मृुथसंजीवनी' पहल का महत्व
केरल अपनी 'मृुथसंजीवनी' पहल के जरिए अंगदान के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य रहा है. राज्य में ब्रेन-डेथ सर्टिफिकेशन और ऑर्गन एलोकेशन के लिए सुव्यवस्थित प्रोटोकॉल हैं. इसी वजह से आलिन के मामले में बिना किसी कानूनी या प्रक्रियात्मक देरी के अंगदान संभव हो सका.
एक ऐतिहासिक उपलब्धि
चिकित्सा जगत में नवजात शिशुओं का अंगदान अत्यंत दुर्लभ माना जाता है क्योंकि इसके लिए कठिन चिकित्सा मानदंडों को पूरा करना होता है. आलिन शेरिन अब्राहम का मामला भारतीय चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर है. प्रधानमंत्री ने नागरिकों को अंगदान के लिए पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए इसे "सबसे बड़ा उपहार" बताया.












QuickLY