Dandi Satyagraha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन (Vice President C.P. Radhakrishnan) ने गुरुवार, 12 मार्च को ऐतिहासिक 'दांडी सत्याग्रह' (Dandi Satyagraha) की वर्षगांठ के अवसर पर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और उन सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों (Heroic Freedom Fighters) को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने इस महान यात्रा में भाग लिया था. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने संदेश में कहा, 'आज ही के दिन 1930 में दांडी मार्च शुरू हुआ था। हम इस यात्रा में शामिल सभी महान विभूतियों को सम्मानपूर्वक याद करते हैं.' यह भी पढ़ें: 'सबका साथ, सबका विकास' पर आज PM Modi का संबोधन: बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर होगा मंथन
'विकसित भारत के लिए प्रेरणा'
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस अवसर पर देशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने दांडी सत्याग्रह को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक 'निर्णायक क्षण' बताया. उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्य और अहिंसा के आदर्शों पर आधारित इस यात्रा ने राष्ट्र में आत्मनिर्भरता की भावना जाग्रत की थी. आज जब हम 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण की ओर अग्रसर हैं, बापू के दिखाए रास्ते हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे."
प्रधानमंत्री मोदी ने दांडी सत्याग्रह पर श्रद्धांजलि दी
सन् 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण!
सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥ pic.twitter.com/8xIDgxvx9y
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी
The historic Dandi Satyagraha, launched on this day in 1930 under the leadership of Mahatma Gandhiji, marked a defining moment in India’s freedom movement, inspiring a nationwide spirit of self-reliance through the ideals of Satya and Ahimsa.
I pay homage to Bapu and all the… pic.twitter.com/yCCM45Vy2p
— Vice-President of India (@VPIndia) March 12, 2026
क्या था दांडी मार्च? (ऐतिहासिक महत्व)
12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से तटीय गांव दांडी तक अपनी ऐतिहासिक पैदल यात्रा शुरू की थी. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा नमक पर लगाए गए अत्यधिक कर (Tax) का विरोध करना था. यह भी पढ़ें: PM Modi on Instagram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स वाले दुनिया के पहले राजनेता बने
- यात्रा की अवधि: यह 24 दिनों तक चलने वाली एक अहिंसक पदयात्रा थी.
- दूरी: लगभग 80 लोगों के साथ शुरू हुई यह यात्रा 390 किलोमीटर लंबी थी.
- जनसमर्थन: यात्रा के दांडी पहुँचने तक इसमें 50,000 से अधिक लोग जुड़ चुके थे.
नमक कानून और ब्रिटिश एकाधिकार
उस समय ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को नमक इकट्ठा करने या बेचने पर प्रतिबंध लगा रखा था. भारतीयों को अंग्रेजों से ही नमक खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था, जिस पर भारी टैक्स वसूला जाता था. गांधीजी ने नमक को विरोध का प्रतीक इसलिए चुना क्योंकि यह हर अमीर-गरीब की बुनियादी जरूरत थी. दांडी पहुँचकर उन्होंने समुद्र किनारे अवैध रूप से नमक बनाकर इस दमनकारी कानून को तोड़ा.
वैश्विक स्तर पर मिला समर्थन
नमक सत्याग्रह ने न केवल ब्रिटिश सत्ता की नींव हिला दी, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया. अमेरिकी और यूरोपीय अखबारों में इस मार्च को व्यापक कवरेज मिली, जिससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को दुनिया भर में नैतिक समर्थन प्राप्त हुआ. यह यात्रा आगे चलकर देशव्यापी 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) का आधार बनी.
आज भी दांडी मार्च को दुनिया के सबसे सफल अहिंसक आंदोलनों में गिना जाता है, जो सत्ता के खिलाफ जनशक्ति के एकजुट होने का प्रतीक है.













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