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Jallikattu 2026: मदुरै के अवनियापुरम में जल्लीकट्टू का आगाज़, पोंगल पर उमड़ा जनसैलाब, सांडों ने दिखाई ताकत (Watch Video)

तमिलनाडु के मदुरै स्थित अवनियापुरम में पोंगल के शुभ अवसर पर साल के पहले बड़े जल्लीकट्टू का भव्य आयोजन हुआ. करीब 1,100 बैलों और 550 प्रतिभागियों के बीच हुए इस साहसिक मुकाबले को देखने हजारों की भीड़ उमड़ी.

Jallikattu 2026: मदुरै के अवनियापुरम में जल्लीकट्टू का आगाज़, पोंगल पर उमड़ा जनसैलाब, सांडों ने दिखाई ताकत (Watch Video)
(Photo Credits ANI)

 Jallikattu 2026: तमिलनाडु में फसल उत्सव 'पोंगल' के उपलक्ष्य में पारंपरिक सांडों को वश में करने वाले खेल 'जल्लीकट्टू' की आज अवनियापुरम में औपचारिक शुरुआत हुई. यह इस साल के तीन प्रमुख आयोजनों में से पहला बड़ा मुकाबला है. राज्य के वाणिज्य कर एवं पंजीकरण मंत्री पी. मूर्ति और मदुरै के जिला कलेक्टर प्रवीण कुमार ने झंडी दिखाकर सुबह करीब 7:30 बजे इस उत्सव का उद्घाटन किया. अखाड़े में उतरने से पहले सभी सांडों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट लिया गया.

भारी सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएं

प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.आयोजन स्थल पर 2,200 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. दर्शकों और प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए वादीवासल (प्रवेश द्वार) के चारों ओर दो-स्तरीय लोहे की बैरिकेडिंग और जालीदार बाड़ लगाई गई है. यह भी पढ़े:  Jallikattu 2025: मदुरै के अवनियापुरम में 1,100 बैलों और 900 बुल-टैमर्स के साथ जल्लीकट्टू प्रतियोगिता शुरू, देखें वीडियो

अवनियापुरम में जल्लीकट्टू का आगाज़

डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हुए पहली बार आयोजन स्थल पर एक डिजिटल स्कोरबोर्ड लगाया गया है, जिस पर हर राउंड के अंक और सांडों की संख्या प्रदर्शित की जा रही है. किसी भी आपात स्थिति के लिए 100 डॉक्टरों की टीम और 12 एंबुलेंस स्टैंडबाय पर रखी गई हैं.

रिकॉर्ड भागीदारी और आकर्षक पुरस्कार

इस साल अवनियापुरम जल्लीकट्टू के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करीब 1,100 बैलों और 550 खिलाड़ियों का पंजीकरण हुआ है. प्रतियोगिता कई राउंड में आयोजित की जा रही है, जहाँ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी और अपराजेय रहने वाले सांड के मालिकों को विशेष पुरस्कार दिए जा रहे हैं.

विजेताओं के लिए पुरस्कारों की सूची काफी लंबी है, जिसमें मुख्य आकर्षण के रूप में:

  • सबसे अधिक सांडों को काबू करने वाले खिलाड़ी के लिए एक नई कार.

  • सर्वश्रेष्ठ सांड के मालिक के लिए एक ट्रैक्टर.

  • इसके अलावा मोटरसाइकिल, सोने-चांदी के सिक्के, अलमारी और नकद पुरस्कार भी शामिल हैं

परंपरा बनाम सुरक्षा नियम

जल्लीकट्टू को तमिलनाडु की 3,000 साल पुरानी संस्कृति का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों के कारण अब इसे कड़ी निगरानी में आयोजित किया जाता है। नियमों के अनुसार, खिलाड़ियों को सांड की कूबड़ (Hump) को ही पकड़ना होता है और उसके सींग या पूंछ खींचने की सख्त मनाही है.

अवनियापुरम के बाद, अब सबकी नजरें कल यानी 16 जनवरी को पालामदु और 17 जनवरी को अलंगनल्लूर में होने वाले विश्व प्रसिद्ध आयोजनों पर टिकी हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 15, 2026 05:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).