India Pakistan Ceasefire: भारत-पाक सीजफायर पर केंद्र सरकार को जवाब देना होगा; पवन खेड़ा
Pawan Kheda (img: tw)

नई दिल्ली, 1 जून : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने ऑपरेशन सिंदूर पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान के एक बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर रविवार को जोरदार निशाना साधा. पवन खेड़ा ने कहा कि देश की जनता को यह जानने का हक है कि किन परिस्थितियों में भारत-पाक के बीच सीजफायर हुआ.

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान पवन खेड़ा ने कहा कि हम लगातार जो सवाल उठा रहे हैं, उसके कारण हमें देशद्रोही कहा जा रहा है. अब तो सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) ने भी विदेश जाकर स्वीकार किया है कि हमारे विमान गिराए गए. देश को यह जानने का अधिकार है कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ. इसके क्या कारण थे और इसका समाधान क्या है. भारत-पाक के बीच इतनी जल्दी सीजफायर क्यों कर दिया गया. जबकि, हमारी सेनाओं ने पाकिस्तान को घुटने पर लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सवाल यह है कि केंद्र सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इतना क्यों डरती है. केंद्र सरकार से सारे सवाल पूछे जाएंगे और उन्हें जवाब देना होगा. इसलिए, कांग्रेस पार्टी संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रही है, जहां केंद्र सरकार देश की जनता को सारे सवाल के जवाब दें. यह भी पढ़ें :पूर्व डीजीपी की किताब में पीएमओ द्वारा कैटरर का बिल नामंजूर करने से लेकर योगी आदित्यनाथ तक के किस्से

ऑपरेशन सिंदूर पर क्रेडिट लेने के एक सवाल के जवाब में कांग्रेस वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप के आंखों में आंख मिलाकर क्यों नहीं कहते हैं कि सीजफायर को लेकर मध्यस्थता की बात झूठ है. पूरा देश पीएम मोदी के साथ खड़ा हो जाएगा. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार होने वाले बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि आने वाले दिनों, हफ्तों और महीनों में बहुत कुछ होने वाला है. प्रधानमंत्री को तैयार रहना चाहिए और सीट बेल्ट बांधकर बैठे रहना चाहिए. खेड़ा का दावा है कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कई समीकरण बदलेंगे.

वहीं, चिराग के चुनाव लड़ने पर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) नेता मलूक नागर ने कहा कि यह अच्छी बात है वह बड़े नेता हैं. वह चुनाव लड़ते हैं तो एनडीए की सरकार बिहार में बनेगी. चिराग पासवान बिहार में चुनाव लड़ेंगे तो उनकी पार्टी को ही मजबूती मिलेगी. ज्यादा से ज्यादा विधायक उनकी पार्टी से चुनकर आएंगे तो यकीनन उनकी पार्टी और एनडीए के लिए यह फायदेमंद साबित होगा. बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव हैं.