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Meerut: एक्सीडेंट के बाद सड़क पर गिरा कांवड़िया, थम गई सांसें, देवदूत बनकर पहुंचे डॉक्टर ने CPR देकर बचाई जान

कुछ वर्षों में लोगों को जिम में ,स्कूल में और किसी भी सार्वजानिक जगहों पर हार्ट अटैक आने लगे. हार्ट आने के बाद कुछ सतर्क और समझदार नागरिकों की मदद से सीपीआर दिया जाता है. जिसके कारण मरीज की जान बच जाती है.ऐसी ही एक घटना मेरठ से सामने आई है.

Meerut: एक्सीडेंट के बाद सड़क पर गिरा कांवड़िया, थम गई सांसें, देवदूत बनकर पहुंचे डॉक्टर ने CPR देकर बचाई जान
Credit-(X,@Khushi75758998)

मेरठ, उत्तर प्रदेश: कुछ वर्षों में लोगों को जिम में ,स्कूल में और किसी भी सार्वजानिक जगहों पर हार्ट अटैक आने लगे. हार्ट आने के बाद कुछ सतर्क और समझदार नागरिकों की मदद से सीपीआर दिया जाता है. जिसके कारण मरीज की जान बच जाती है.ऐसी ही एक घटना मेरठ से सामने आई है. जहांपर एक कांवड़िया, गाजियाबाद जिले से हरिद्वार बाइक जल लाने के लिए जा रहा था और इसी दौरान एक वाहन से बाइक को टक्कर मार दी और ये शख्स सीधे छाती के बल जमीन पर गिर गया. जब उसके साथ के लोगों ने उसे चेक किया तो उसकी सांसें थम चुकी थी.

इस दौरान एक डॉक्टर जो की वहां से जा रहे थे, उन्होंने इस शख्स को सीपीआर दिया और इसकी जान बचाई.ये भी पढ़े:Bareilly: ऑटो रिक्शा चालक को आया हार्ट अटैक, पुलिस ने CPR देकर बचाई जान, बरेली का वीडियो आया सामने;VIDEO

क्या है पूरी घटना?

प्रवीण नामक युवक गाजियाबाद जिले के दौलतपुरा से अपने बेटे, साले और दोस्तों के साथ बाइक से हरिद्वार जल लाने जा रहे थे. रास्ते में वलीदपुर ट्रक यार्ड के पास अचानक एक वाहन से उनकी टक्कर हो गई. बाइक फिसल गई और प्रवीण छाती के बल सड़क पर जा गिरे. उनके साथियों ने जब उन्हें उठाया तो उनकी सांसें रुक चुकी थीं.इस अप्रत्याशित स्थिति ने सभी को स्तब्ध कर दिया. 10 वर्षीय बेटा घबरा गया और रोने लगा. साले और दोस्त भी असहाय महसूस कर रहे थे. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए.तभी उम्मीद की एक किरण डॉक्टर कुलदीप के रूप में सामने आई.गांव की प्रधान राखी के पति डॉ. कुलदीप उस समय बाइक से लौट रहे थे.

भीड़ देखकर वे रुके और जब स्थिति जानी, तो बिना देर किए प्रवीण को चारपाई पर लिटाया. उन्होंने खुद छाती दबाकर और मुंह से सांस देकर सीपीआर देना शुरू किया.लगातार 20 मिनट तक डॉक्टर कुलदीप ने सीपीआर की प्रक्रिया जारी रखी. यह एक कठिन प्रयास था, लेकिन उनका अनुभव और धैर्य रंग लाया. आखिरकार प्रवीण की सांसें लौट आईं और वहां मौजूद हर व्यक्ति ने राहत की सांस ली.

बिना किसी मशीन के बचाई जान

डॉ. कुलदीप ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार लोगों को सीपीआर दिया है, लेकिन यह पहली बार था जब उन्होंने बिना किसी मेडिकल उपकरण के पूरी तरह मैनुअल तरीके से किसी की जान बचाई.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 21, 2025 04:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).