Salary Hike Disputes: सहकर्मी से सैलरी पर चर्चा करना पड़ा भारी: कर्मचारी की 21% की बढ़ोतरी में HR ने लगाई कटौती, इंटरनेट पर छिड़ी बहस
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Salary Hike Disputes: कार्यस्थल (Work Place) पर वेतन की पारदर्शिता (Pay Transparency) को लेकर एक नया विवाद (New Controversy) सामने आया है. एक कर्मचारी, जिसे सालाना वेतन  (Salary) में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी का वादा किया गया था, उसे कथित तौर पर तब नुकसान उठाना पड़ा जब उसने अपने एक सहकर्मी के साथ इस बारे में बात की. इस चर्चा के बाद कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स (HR) विभाग ने प्रस्तावित वेतन वृद्धि में भारी कटौती कर दी. इस घटना के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर 'पीठ में छुरा घोंपने' (Backstabbing) और कॉर्पोरेट नीतियों पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. यह भी पढ़ें: Income Tax: नए श्रम कानूनों से बदल सकती है आपकी टेक-होम सैलरी, जानें क्या होगा असर

$73,000 का वादा और $5,500 की कटौती

रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारी का वार्षिक वेतन $60,000 (लगभग 50 लाख रुपये) था, जिसे बढ़ाकर $73,000 करने का मौखिक वादा किया गया था. हालांकि, एक कैजुअल बातचीत के दौरान कर्मचारी ने अपने सहकर्मी को इस बढ़ोतरी के बारे में बता दिया.

जैसे ही यह जानकारी HR तक पहुंची, कर्मचारी को सूचित किया गया कि उसका संशोधित वेतन अब केवल $67,500 होगा. इस तरह, शुरुआती वादे के मुकाबले वेतन में $5,500 (लगभग 4.5 लाख रुपये) की सीधी कटौती कर दी गई. कर्मचारी का दावा है कि यह कटौती केवल वेतन पर चर्चा करने की सजा के तौर पर की गई है.

क्या कहते हैं श्रम कानून? (NLRA के नियम)

इस घटना ने कानूनी विशेषज्ञों का ध्यान भी खींचा है. अमेरिका के नेशनल लेबर रिलेशंस एक्ट (NLRA) के तहत, कर्मचारियों को अपने सहयोगियों के साथ वेतन, बोनस और रोजगार की अन्य शर्तों पर चर्चा करने का कानूनी अधिकार है. इसे 'प्रोटेक्टेड कन्सर्टेड एक्टिविटी' माना जाता है.

कानून नियोक्ताओं को वेतन संबंधी चर्चाओं के लिए कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करने से रोकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि वेतन में कटौती का कारण केवल 'सैलरी टॉक' था, तो कंपनी को नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (NLRB) की जांच का सामना करना पड़ सकता है.

मौखिक वादों का जोखिम

HR विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही कानून वेतन पर चर्चा की सुरक्षा करता है, लेकिन 'मौखिक वादों' (Verbal Offers) की कानूनी मान्यता सीमित होती है. जब तक कोई वेतन संशोधन लिखित रूप में जारी नहीं किया जाता या पेरोल सिस्टम में दर्ज नहीं होता, तब तक नियोक्ता उसमें बदलाव कर सकते हैं. यह एक 'ग्रे एरिया' पैदा करता है जहां कर्मचारी के लिए अपनी बात साबित करना मुश्किल हो जाता है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Salary Hike: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में हो सकता है भारी इजाफा; जानें कितना बढ़ेगा वेतन और क्या हैं उम्मीदें

पे ट्रांसपेरेंसी पर वैश्विक बहस

इस घटना ने दुनिया भर में वेतन पारदर्शिता की मांग को और तेज कर दिया है. कई देशों में कंपनियां अब जेंडर पे गैप और वेतन असमानता को दूर करने के लिए डिस्क्लोजर नॉर्म्स अपना रही हैं.  आलोचकों का तर्क है कि वेतन पर चर्चा करने के लिए दंडित करना इन सुधारवादी प्रयासों को कमजोर करता है और कार्यस्थल पर पक्षपातपूर्ण रवैये को बढ़ावा देता है.

सोशल मीडिया पर लोग उस सहकर्मी की भी आलोचना कर रहे हैं जिसने कथित तौर पर यह बात HR तक पहुंचाई. इस मामले ने कर्मचारियों के लिए एक सबक पेश किया है कि वेतन वार्ता के दौरान दस्तावेजों का होना कितना अनिवार्य है.