Income Tax: बजट 2026 की आहट और नए श्रम कानूनों के लागू होने के साथ ही नौकरीपेशा वर्ग के बीच अपनी सैलरी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हुए चार नए लेबर कोड्स (श्रम संहिताएं) भारत के रोजगार ढांचे में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव लेकर आए हैं. इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है, लेकिन इसके चलते मासिक 'इन-हैंड' सैलरी की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी पर बड़ा अपडेट; मांगों को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही होगी बड़ी बैठक
सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को चार सरल कोड्स में समाहित किया है:
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वेतन संहिता (Code on Wages)
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औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
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सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)
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व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (OSH Code)
क्या है '50 प्रतिशत वेज रूल'?
इन सुधारों में सबसे चर्चित बदलाव 'वेतन' (Wages) की नई परिभाषा है. वेतन संहिता के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का 'बेसिक पे' (मूल वेतन) और 'महंगाई भत्ता' (DA) उसके कुल सीटीसी (CTC - Cost to Company) का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए.
अब तक कई कंपनियां पीएफ और ग्रेच्युटी के बोझ को कम करने के लिए बेसिक सैलरी को 30-40 प्रतिशत पर रखती थीं और बाकी हिस्सा भत्तों (Allowances) के रूप में देती थीं. नए नियमों के तहत यदि भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि को 'वेतन' में जोड़ दिया जाएगा.
इन-हैंड सैलरी पर प्रभाव
जब बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो अनिवार्य भविष्य निधि (PF) का योगदान भी बढ़ जाता है. कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत पीएफ में देते हैं. बेसिक पे बढ़ने से यह कटौती बढ़ जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप मासिक टेक-होम सैलरी में कमी आ सकती है.
हालांकि, मध्यम और उच्च आय वर्ग के लिए राहत की बात यह है कि 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) से ऊपर पीएफ योगदान स्वैच्छिक बना हुआ है. यदि नियोक्ता और कर्मचारी इस सीमा पर योगदान को सीमित रखने का विकल्प चुनते हैं, तो इन-हैंड सैलरी पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक लाभ
भले ही मासिक नकद प्रवाह (Cash Flow) थोड़ा कम हो जाए, लेकिन नए कानून रिटायरमेंट की सुरक्षा को बढ़ाते हैं:
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बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस: पीएफ में अधिक योगदान से सेवानिवृत्ति के समय बड़ी राशि जमा होगी.
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ग्रेच्युटी में वृद्धि: ग्रेच्युटी की गणना अंतिम बेसिक सैलरी पर होती है, जो अब पहले से अधिक होगी.
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फिक्स्ड टर्म कर्मचारी: अब अनुबंध (Contract) पर काम करने वाले कर्मचारी भी एक साल की सेवा के बाद 'प्रो-रटा' आधार पर ग्रेच्युटी के हकदार होंगे.
वर्तमान स्थिति और कर्मचारियों के लिए सलाह
श्रम कानून वर्तमान में बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को मसौदा नियम जारी किए थे, जिन पर फरवरी 2026 के मध्य तक सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं. पूर्ण कार्यान्वयन राज्यों द्वारा अपने नियमों को संरेखित करने के बाद होगा.
बजट 2026 के करीब आने पर कर्मचारियों को अपनी कंपनी की एचआर टीम से संपर्क करना चाहिए. यह समझना आवश्यक है कि नए नियमों के तहत उनकी टैक्स प्लानिंग, बचत रणनीति और मासिक खर्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा.













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