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Karnataka Social Media Ban: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा प्रतिबंध

कर्नाटक सरकार ने बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बजट सत्र के दौरान 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है.

Karnataka Social Media Ban: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा प्रतिबंध
(Photo Credits Pixabay)

Karnataka Social Media Ban:   कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है. शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को राज्य का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कर्नाटक में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा. सरकार का मानना है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत बच्चों के विकास में बाधक बन रही है.

बजट 2026-27 में अहम घोषणा

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए इस नीति को स्वास्थ्य और शिक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा, "बच्चों पर मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों को रोकना समय की मांग है. इसी उद्देश्य से हम 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए इन प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर रोक लगाएंगे."  यह भी पढ़े:   Karnataka Temple New Rules: कर्नाटक के मंदिरों में ‘रील’ बनाने पर लगाम, सरकार ने लागू किए सख्त नियम; अब वीडियोग्राफी के लिए देनी होगी भारी फीस

कार्यान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा

हालांकि सरकार ने इस बड़े फैसले की घोषणा कर दी है, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत कार्ययोजना अभी साझा नहीं की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र का सत्यापन (Age Verification) और तकनीक के माध्यम से इस पर नजर रखना एक बड़ी चुनौती होगी. सरकार जल्द ही इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है कि सोशल मीडिया कंपनियां और इंटरनेट सेवा प्रदाता इस नियम का पालन कैसे सुनिश्चित करेंगे.

अभिभावकों की मिश्रित प्रतिक्रिया

अभिभावकों के एक बड़े वर्ग ने सरकार के इस साहसिक कदम का स्वागत किया है. कई माता-पिता का मानना है कि इससे बच्चों को साइबर बुलिंग और अश्लील सामग्री से बचाने में मदद मिलेगी. हालांकि, कुछ अभिभावकों ने इसके कार्यान्वयन की व्यावहारिकता को लेकर आशंका जताई है. उनका कहना है कि आज के दौर में शिक्षा के लिए भी इंटरनेट अनिवार्य है, ऐसे में सोशल मीडिया और शैक्षिक सामग्री के बीच अंतर स्पष्ट करना जरूरी होगा.

बच्चों के डिजिटल स्वास्थ्य पर ध्यान

हाल के वर्षों में कई अध्ययनों ने संकेत दिया है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की कमी, नींद में व्यवधान और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. कर्नाटक सरकार का यह कदम किशोरों को डिजिटल दुनिया के जोखिमों से बचाने के वैश्विक प्रयासों की दिशा में देखा जा रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 07, 2026 10:42 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).