Gurmeet Ram Rahim Singh Acquitted: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया. यह फैसला निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के लगभग सात साल बाद आया है. हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में दो अन्य सह-आरोपियों की अपील को खारिज करते हुए उनकी सजा बरकरार रखी है.
सबूतों और गोलियों पर विवाद बना आधार
हाई कोर्ट का यह फैसला मामले में पेश किए गए सबूतों की विस्तृत समीक्षा के बाद आया है. पिछले कुछ हफ्तों से अदालत इस मामले में इस्तेमाल की गई गोलियों और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच कर रही थी. बचाव पक्ष ने गोलियों के मिलान और घटनाक्रम को लेकर कई तकनीकी सवाल उठाए थे. कोर्ट ने इन बिंदुओं पर गौर करने के बाद राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के चलते उन्हें बरी करने का निर्णय लिया. यह भी पढ़े: Ram Rahim Singh Granted Parole: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह फिर आएगा जेल से बाहर, 50 दिन की मिली पैरोल
फिलहाल जेल में ही रहेंगे राम रहीम
भले ही पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम को बड़ी राहत मिली हो, लेकिन वे अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे. राम रहीम वर्तमान में बलात्कार के एक अन्य मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी सजा काट रहे हैं. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस बरी होने के फैसले का उनकी मौजूदा सजा पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
16 साल बाद आया था निचली अदालत का फैसला
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या साल 2002 में हुई थी. इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2019 में एक विशेष अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य को दोषी करार दिया था. यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा क्योंकि अपराध और सजा के बीच 16 साल का अंतराल था. छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा मुख्यालय के भीतर हो रहे शोषण के खिलाफ खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी.
डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव और पैरोल विवाद
सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा का हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में व्यापक प्रभाव है. राम रहीम को 2017 में बलात्कार के मामले में सजा होने के बाद से अब तक 14 बार अस्थायी रिहाई (पैरोल या फरलो) मिल चुकी है. अपनी रिहाई के दौरान वे अधिकतर समय उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित आश्रम में बिताते रहे हैं. इस बार-बार मिलने वाली पैरोल को लेकर भी समय-समय पर विवाद और राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं.












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