Bengaluru Woman Body Lotion News: बेंगलुरु में अनोखा केस, बॉडी लोशन न खरीदने पर पत्नी पहुंची कोर्ट, फैसले ने सबको चौंकाया
बेंगलुरु में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ सिर्फ इसलिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया क्योंकि वह उसकी पसंद का बॉडी लोशन लाना भूल गया था. कर्नाटक हाई कोर्ट ने इसे 'मामूली विवाद' बताते हुए दंपति को परामर्श के लिए भेजा है.
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Bengaluru Woman Body Lotion News: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति के खिलाफ केवल इसलिए कानूनी शिकायत दर्ज कराई क्योंकि वह उसकी पसंद का बॉडी लोशन नहीं खरीद सका. यह घरेलू विवाद घर की चारदीवारी से निकलकर कर्नाटक हाई कोर्ट तक पहुंच गया. अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वैवाहिक जीवन में आने वाली छोटी-मोटी शिकायतों और न्यायिक संसाधनों के सही उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है.
क्या है पूरा विवाद?
कई वर्षों से विवाहित इस जोड़े के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब पति अपनी पत्नी द्वारा मांगे गए स्किनकेयर उत्पाद (बॉडी लोशन) के बिना घर लौटा. महिला का आरोप है कि यह केवल एक लोशन का मामला नहीं है, बल्कि उसके पति द्वारा उसकी बुनियादी जरूरतों और अनुरोधों की लगातार अनदेखी की जाती है, जो मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है. महिला ने दावा किया कि पति अपने खर्चों को प्राथमिकता देता है लेकिन उसकी जरूरतों को नजरअंदाज करता है. यह भी पढ़े: समय बर्बाद मत करो! पालतू कुत्ते की वापसी के लिए हाईकोर्ट पहुंची महिला, अदालत ने लगाया 1000 रुपये का जुर्माना
पति की दलील: काम का तनाव और भूल
दूसरी ओर, पति ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह काम के तनाव के कारण बॉडी लोशन लाना भूल गया था और यह महज एक दुर्घटना थी. उसने दलील दी कि एक कॉस्मेटिक उत्पाद के लिए कोर्ट केस करना 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' है. पति के अनुसार, ऐसे निजी मामलों को घर पर ही सुलझाया जाना चाहिए न कि अदालत में.
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान, कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस याचिका पर नाराजगी जाहिर की. पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून गंभीर क्रूरता और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है.
अदालत ने कहा, "वैवाहिक जीवन में छोटे-मोटे मतभेद होना स्वाभाविक है. मामूली घरेलू कामों या खरीदारी को लेकर अदालतों पर बोझ डालना उन महत्वपूर्ण मामलों से ध्यान भटकाता है जिन्हें न्याय की सख्त जरूरत है." न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि बॉडी लोशन न लाना तब तक 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता जब तक कि यह किसी व्यापक शारीरिक या मानसिक शोषण का हिस्सा न हो.
समाधान के लिए मध्यस्थता केंद्र भेजा गया
हाई कोर्ट ने वर्तमान में इस मामले को बेंगलुरु मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में स्थानांतरित कर दिया है. अदालत ने दंपति को कानूनी कार्रवाई के बजाय पेशेवर काउंसलिंग लेने की सलाह दी है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच संचार की कमी को दूर करना और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड के मामले को सुलझाना है. अब मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान उनके बीच वित्तीय प्रबंधन और आपसी तालमेल पर ध्यान दिया जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 05, 2026 06:55 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

